“तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप में शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने के लिए सदियों से एक खास पेय का इस्तेमाल होता आया है ठंडाई। यह सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा रखने और तरोताजा करने में भी बेहद फायदेमंद है। आइए जानते हैं गर्मियों में ठंडाई का सेवन क्यों जरूरी है।”
ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की किरणें सीधी गिरती है जिसके कारण जल, थल एवं नभ तीनों भागों का तामपान अधिक होने लगता है। पृथ्वी पर वायु अत्यधिक गर्म होकर लू का रूप धारण करने लगती है। लू के थपेड़ों तथा ज्यादा गर्मी के कारण शरीर का तापक्रम असामान्य रूप से बढ़ जाता है। फलस्वरूप शरीर से पसीना अधिक आता है। हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। बार-बार प्यास लगती है। गरम पदार्थ व बाजारू पेय आदि का सेवन इस ऋतु में हानिकारक होता है और ऐसे समय में शरीर को हल्का पाचक एवं संपूर्ण पोषक तत्वों में भरपूर आहार या पेय की आवश्यकता होती है। ‘ठण्डाई’ ही एक ऐसा पेय है जो शरीर को उपयोगी द्रव्यों के साथ शीतलता प्रदान कर एक नई ताजगी प्रदान करती है। ग्रीष्म ऋतु में यदि प्रातःकाल या सायंकाल ठण्डाई का सेवन किया जाय तो हम अनेक विकारों से मुक्त हो सकते हैं।
गर्मी के दिनों में इस शीतल पेय ठण्डाई का प्रचलन लगभग सभी घरों में शुरू हो जाता है। सामूहिक रूप से भी बाग, बगीचों, मंदिरों में भी इसका प्रयोग होता है तथा शादी विवाह तथा उत्सवों में भी ठण्डाई को विशेष रूप से पिलाया जाता है। हमारे यहाँ बनारस, इलाहाबाद, मथुरा, नाथद्वारा, उज्जैन और हरिद्वार आदि स्थानों में बारह मास ही ठण्डाई की बिक्री भी कई दुकानों पर होती है। कई नियमित ठण्डाई पीने वाले व्यक्ति भी घरों में भी सुबह शाम ठण्डाई घोटते हैं
तथा पीते हैं।
ठण्डाई में प्रयोग होने वाली सामग्री – सौंफ, खरबूज, तरबूज, ककड़ी की मिजी (बीज), बादाम, कालीमिर्च, पिस्ता, खसखस, छोटी इलायची, गुलाब के फूल, मुनक्का आदि को मिश्रित कर ठण्डाई बनाई जाती है। दस व्यक्तियों के लिए ठण्डाई बनाने के लिए 200 ग्राम मिश्रित सामग्री पर्याप्त होती है। कच्चा दूध तथा शक्कर का ठण्डाई बनाने में प्रयोग होता है। ठण्डाई में उपयोग की जाने वाली सामग्री पंसारी की दुकान पर मिश्रित की हुई तथा अलग-अलग मिलती है। आजकल बाजार में सूखी पीसी हुई ठंडाई के पैकिट तथा घुटी हुई ठण्डाई भी बोतलों में शर्बत की तरह उपलब्ध हो रही है। किंतु इसमें शुद्धता की पूरी गारंटी नहीं होती है। जो ताजगी, स्वाद, शुद्धता एवं लाभ तुंरत घोटी हुई ठण्डाई पीने से होता है वह बाजार में उपलब्ध ठण्डाई से नहीं मिल सकता।
बनाने की विधि – ठण्डाई बनाने का कोई समय निश्चित नहीं होता है, किंतु मुख्यतः ठण्डाई सुबह और शाम को ही पीते हैं। ठण्डाई बनाने से लगभग दो घंटे पूर्व सभी सामग्री को गलाने के लिए पानी में भिगोकर रखना चाहिए। सभी सामग्री को बारीक पीसकर सूती कपड़े के द्वारा छान लेवें। इस छनी हुई ठण्डाई में दूध तथा शक्कर आवश्यकतानुसार मिलावें। थोड़ी मात्रा में बर्फ एवं ऊपर केशर की कुछ पत्तियाँ डाल देवें। अब तैयार है पीने पिलाने के लिए ‘ठण्डाई’। ठण्डाई को विशेष स्वादिष्ट बनाने के लिए गर्मी में आम तथा संतरे का रस भी मिलाया जाता है। कई व्यक्ति ठण्डाई में रबड़ी मिलाकर पीते हैं यह स्वादिष्ट अधिक होती है किंतु गुणकारी और पाचक कम होती है।
ठण्डाई और भांग – कई स्थानों पर ठण्डाई में भांग का भी प्रयोग किया जाता है। जिन व्यक्तियों की नशा करने की आदत होती है, वे कुछ मात्रा में भांग की मिलाकर ठंडाई पीते हैं। उनका मानना है कि इससे उन्हें कब्ज नहीं रहती है, भूख बढ़ती है तथा रात्रि में नींद अच्छी आती है। नींद अच्छी आने से थकावट दूर हो जाती है और दूसरे दिन ताजा महसूस करते हैं। प्रायः होली तथा शिवरात्रि के दिन ठण्डाई में भांग मिलाकर पीते तथा पिलाते हैं। भांगयुक्त ठण्डाई बच्चों तथा महिलाओं को नहीं पिलाना चाहिए। जिन व्यक्तियों ने कभी पहले भांग की ठण्डाई नहीं पी हो उन्हें भी यह नहीं पिलाना चाहिए। इसे वे सहन नहीं कर सकते तथा उन्हें चक्कर आने लगता है। संक्षेप में यही कह सकते हैं कि ठण्डाई ग्रीष्म ऋतु में सभी को सेवन करनी चाहिए। इसके सेवन करने से शरीर में ताजगी, स्फूर्ति एवं शीतलता रहती है।

डॉ. कृष्णचन्द्र टवाणी
प्रधान संपादक 'अध्यात्म अमृत' ज्ञानमंदिर,
सिटी रोड, मदनगंज-किशनगढ़ (राज.)