स्वास्थ्य वाटिका के प्रति पाठकों के संबोधन

प्रधानमंत्री की तरफ से पत्र


आदरणीय डॉ. ममतानीजी, सादर वंदे!
डॉ. ममतानी दंपति द्वारा संपादित त्रैमासिक पत्रिका ‘‘स्वास्थ्य वाटिका‘‘ हर उम्र के लिए मार्गदर्शिका साबित होगी। पत्रिका का मुख पृष्ठ अन्य पत्रिकाओं से भिन्न है। पत्रिका में दिए गए लेखो में अनुभूत नुस्खे अपनाकर स्वास्थ्य लाभ पा सकते है। स्वस्थ जीवन जीने के महत्वपूर्ण पहलू जैसे आहार-विहार, योगासन की जानकारी पत्रिका को महत्वपूर्ण स्थान दिलाते है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह पत्रिका भारतीय चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में सहायक होगी व आयुर्वेद की अलख जगाकर जन-जन के कल्याण में सार्थक सिद्ध होगी।
श्री तुलसी सेतिया, संयोजक,
सिंधुड़ी यूथ विंग, नागपुर
Dr. G. M. Mamtani,
Sir,

I am very pleased to be a regular reader of the `Swasthya Vatika, a well designed and useful tri-monthly health magazine in Hindi of G Kumar Aroygadham brought out by the well-known Dr Mamtani couple from Nagpur for the last 12 years. `Swasthya Vadika’, over the years, has proved to be an extremely useful magazine in helping and guiding people in the diagnosis and treatment of a number of diseases through Ayurvedic treatment. The magazine’s well-researched articles by the Managing Editor Dr G M Mamtani, Editor Dr Anju Mamtani and other eminent writers make very good reading and are very informative. My family eagerly awaits the magazine every month. I am sure in the years to come the magazine will grow in leaps and bounds and reach a larger number of people. My best wishes
Rajendra Khatry
Senior Author Firstpost (news website) Chandigarh 09417303129

अत्यंत हर्ष का विषय है कि सबकी प्रिय पत्रिका ‘स्वास्थ्य वाटिका‘ ने प्रकाशन के 10 वर्ष सफलता पूर्वक पूर्ण कर लिये हैं। इस अवधि में पत्रिका ने हर पहलू को निखारा है। सम्पादकीय की सहज-सरल भाषा, वस्तुविषय का संतुलित चयन, आध्यात्मिक-मनोरंजक-ज्ञानप्रद सामग्री, ऋतुनुसार मार्गदर्शक लेख, उच्च कोटि का मुद्रण आदि विशेषताओं ने इसे उत्कृष्ट बनाया हैं। ‘अध्यात्म वाटिका‘ के प्रस्तोता एवं कलगीधर संत्संग मंडल के संयोजक अधिवक्ता माधवदास ममतानी के प्रति हम विशेष तौर पर हार्दिक आभार प्रकट करते हैं, जो हर अंक में पाठकों को धार्मिक पथ पर निष्ठा के साथ अग्रसर होने का संदेश देते हुए आध्यात्मिक सरिता की धारा में बहाकर मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं। ‘गतिविधियां‘ स्तंभ में आपके द्वारा आयुर्वेद-जगत के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों व उपलब्धियों की जानकारी सतत मिलती रहती है। इसमें तनिक भी संदेह नहीं कि स्वास्थ्य वाटिका पत्रिका हर सदस्य को कुछ न कुछ ‘उपहार‘ अवश्य देती है। इस बहुमुल्य पत्रिका की अनवरत प्रगति की कामना...!
श्री किशन हरिसिंघानी
श्रीमति राधा हरिसिंघानी
भोपाल

आदरणीय डॉ. ममतानीजी, सादर हरिस्मरण!
यह समाचार पढ़कर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि आप दंपति को भारतीय आयुर्वेद विकास विश्व विज्ञान शोध संस्था जौनपुर द्वारा क्रमशः आयुर्वेद चिकित्सा भूषण एवं हिमालय एवं हिन्दुस्तान अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही ऑल इंडिया स्माल एंड मिडियम जर्नलिस्ट वेलफेयर असोसिएशन, अजमेर द्वारा ‘स्वास्थ्य वाटिका के प्रकाशन के लिये सम्मान पत्र भी प्रदान किया गया। इस उपलब्धि पर मेरा अभिनंदन स्वीकार कीजिए। समुद्र मंथन से उद्भूत 14 रत्नों में एक भगवान धनवन्तरि भी थे, जिनके करकमलों में आयुर्वेद शास्त्र था। अतः यह चिकित्सा ईश्वरीय प्रसाद है, जो हमारे ऋषियों द्वारा अनुभूत एवं प्रचारित है। इसकी सेवा आप कर रहे हैं, यह गौरवपूर्ण है। मैं भविष्य में भी आपकी अन्य उपलब्धियों की कामना करता हूं। शेष भगवत् कृपा।
श्री रामकृष्ण पोद्दार
पोदारेश्वर राम मंदिर नागपूर

प्रिय डॉ. ममतानी,
आपके द्वारा प्रकाशित स्वास्थ्य वाटिका के 2 अंक मिले, जिसमें जनोपयोगी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत की है। अतः धूतपापेश्वर कंपनी की ओर से इस सुंदर प्रस्तुति के लिए आपको बधाई। भविष्य के अंको के लिए हार्दिक शुभेच्छा।
श्री रणजीत पुराणिक
धूतपापेश्वर प्रा.लि.मुंबई

माननीय संपादिका जी,
आपका पत्र व ‘‘स्वास्थ्य वाटिका अंक-2‘‘ प्राप्त हुए, बेहद खुशी हुई। सर्वप्रथम इस भगवत् कार्यारम्भ पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपने पत्रिका का आधार ऋतुओं को रखा है जो प्रासंगिक होने के कारण प्रशंसनीय भी है। आपका व्यक्तित्व व सुलझी, विस्तृत विचारधारा प्रकाशन की कामयाबी की नींव बनें, ऐसी आशा है। पत्रिका का आवरण पृष्ठ काफी आकर्षक एवं संतुलित बनाया गया है। प्रसंगानुकुल दिये गये चुने हुए नुस्खे खास उपयोगी हैं और ‘‘गागर में सागर‘‘ की महत्ता रखते है। ‘वसंत ऋतु के नुस्खे‘, ‘जनविरोधी जनसंख्या‘, ‘लौकी से रिश्ता...‘, ‘ब्रम्हचर्य....‘, श्री नरेंद्र सतीजा द्वारा संकलित स्व.श्री अरुण ऋषि के नुस्खे ‘इन्हें आजमाईये‘, आत्मविश्वास‘ आदि लेख पढ़े और सभी को बहुपयोगी पाया।
श्री ए.के.अवस्थी,
संपादक-ज्योतिष दृष्टि, कोटा, राजस्थान

स्वास्थ्य वाटिका त्रैमासिक पत्रिका देखने में काफी आकर्षक है। उसमें दी गई जानकारी दैनंदिन जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य व सौंदर्य पर विशेष रुप से लेख दिए गए हैं इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण जानकारी का खजाना है। मेरा सुझाव है कि इसमें रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोगी सब्जी-फल को घर में कैसे उगाया जाए उसकी भी जानकारी दें।
श्रीमती रचना एहसान कुरेशी
सिवनी

प्रिय डॉ. ममतानीजी,
स्नेहांकित प्रणाम!

आपके द्वारा संपादित एवं प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘स्वास्थ्य वाटिका‘ का अवलोकन कर सुखद अनुभूति हुई। इसमें सम्मिलित श्रेष्ठ मार्गदर्शक सामग्री सराहनीय है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार व मानव स्वास्थ्य के कल्याणार्थ आप दंपति द्वारा जो भगीरथ प्रयास किए जा रहे हैं, निस्संदेह अनुपम हैं। अभिनंदन स्वीकारें!
श्री गिरीश गांधी,
विश्वस्त, वनराई (पूणे), संपादक, ‘ग्रीन होप‘, नागपुर.

सादर वंदे!
स्वास्थ्य वाटिका अंक 23, अपैल-जून 2011 में अधि.माधवदास ममतानीजी ने गौरक्षा के लिए गुरुजी के बलिदान की सत्य घटना पर पूरा लेख लिखते हुए गौरक्षा का संदेश दिया है। सार यह है कि गौरक्षा होगी, तो ही हमारे राष्ट्र की रक्षा होगी। स्वस्थ तन-मन के नागरिक ही राष्ट्र की रक्षा कर सकते हैं। भारत देश को स्वस्थ रखने के लिए गाय का दूध, घी तथा अन्य उत्पादनों के लिए गोबर और गोमूत्र चाहिए। इन सबके लिए गौरक्षा नितांत आवश्यक है। यह संदेश सचमुच समय की मांग है। मैं इस लेख के लेखक अधि. माधवदास ममतानीजी की दीर्घायु की कामना करता हूं। वस्तुविषय पढ़कर आत्मा और मन को नई चेतना मिली। ऐसी राष्ट्रोपयोगी सामग्री के प्रकाशन के लिए आपकी पत्रिका को साधुवाद!
श्री निवास शर्मा शास्त्री,
संस्थापक-वीर सावरकर विचार मंच, रेवाड़ी (हरियाणा)

आज स्वास्थ्य वाटिका की एक अतिरिक्त प्रति और मिली। अनेक धन्यवाद। अपैल से जून के इस त्रैमासिक अंक में उच्चकोटि की सामग्री संजोई गई है। इनमें से एड़ी का दर्द, धातुरोग एवं पंचकर्म पर मंथन किये गए जो लेख हैं, निश्चय ही हमारे वाचनालय के पाठक इनसे लाभ उठाएंगे। मैं आपके द्वारा पत्रिका के संपादकीय में हमारी संस्था द्वारा भेंट किए हुए ‘संपादक शिरोमणि‘ सम्मान के उल्लेख से अभिभूत हूं। कृपया मेरी कृतज्ञता स्वीकारे। पत्रिका के अन्य सभी लेख अत्यंत सुंदर हैं।
स्व. श्री भगवती प्रसाद देवपूरा,
प्रधानमंत्री, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा

परम पूज्यवर, श्री चरणों में प्रणाम !
आपके द्वारा संपादित जीवनपयोगी परम-पावन पत्रिका स्वास्थ्य वाटिका का मोटापा निवारण विशेषांक 2010 पढ़कर हृदय आनंदित हो गया। वास्तव में यह एक घरेलू पत्रिका है, जिसे एकसाथ बैठकर घर के समस्त प्राणी बड़े, बूढ़े, बच्चे पढ़ सकते हैं। इसमें बच्चों से छिपाने जैसा कोई भी लेख नहीं है। ऐसी सुंदर पत्रिका के प्रकाशन हेतु सपत्नीक मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। अपने हृदय भाव संबोधन पत्रिका के विषय में मैंने यूं लिख दिया है -
स्वास्थ्य वाटिका, स्वास्थ्य वाटिका
प्रसन्न रहें, सब पाठक-पाठिका।
डाॅ. जी. एम. ममतानी का आरोग्यधाम
सब बीमारियों में जन-जन को दे आराम।
डाॅ. ममतानी दंपति द्वारा संपादित
स्वास्थ्य व ज्ञानवर्धक लेखों से आच्छादित।
थोड़ा पढ़ोगे, पर ज्ञान पाओगे ज्यादा से ज्यादा।
यही है पत्रिका पढ़ने का सबसे बड़ा फायदा।
हृदय की भावना अर्पित कर, तन-मन सुख पाया।
स्वास्थ्य वाटिका का प्रेमी बन कुछ नुस्खा अपनाया।
शिवकुमार श्रीवास्तव प्रेमी
प्रतापगढ़ (उ. प्र.)

स्वास्थ्य वाटिका में प्रकाशित प्रतियोगिता क्र. 13 में पहली बार भाग लिए एवं द्वितीय स्थान प्राप्त कर अत्यधिक प्रसन्नता हुई। जो मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। पत्रिका में प्रकाशित विवरण अद्वितीय व संग्रहणीय अंक रहते हैं क्योंकि जिस व्यक्ति के रोग से संबंधित विवरण रहता है उस रोग से निजात पाने वाले व्यक्ति के पास पत्रिका परिवार के लिये आत्मा से श्रद्धा रूपी आंसू निकलने लगते है। मैं एक अभियान चलाने जा रहा हूं कि सभी लोग अपने प्रिय जन की खुशी, महोत्सव, जन्मदिन, वर्षगांठ, विभिन्न कायक्रमों में अन्य उपहार देने की अपेक्षा ‘स्वास्थ्य वाटिका‘ के अंक उपहार प्राप्त करें, उपहार प्राप्त कर व्यक्ति आज नहीं तो कल अवश्य पत्रिका का अध्ययन करेगा और उपहार की उपयोगिता समझ आयेगी। अच्छे साहित्य से व्यक्ति का जीवन बदल सकता है। डॉ. ममतानी जी को सपरिवार साधुवाद एवं हार्दिक शुभकामनाएं।
मनोज कुमार ताम्रकर (योग प्रशिक्षक)
जिला - सागर (म.प्र.)

आदरणीय डॉ. ममतानीजी,
सादर वंदे!
मैंने आपके द्वारा प्रकाशित स्वास्थ्य वाटिका के अंक 10 का अवलोकन किया। आज के भागदौड़ के युग में भी आदमी थोड़ा अपने खान पान एंव योग-प्राणायाम या फिर थोड़ी एक्सरसाइज करके आपको स्वस्थ कैसे रख सकता है, यह सारी बातें आपकी पत्रिका में बहुत ही सुंदर ढंग से समझाई गई हैं। मैं आपकी पत्रिका को पढ़ कर बहुत प्रभावित हुआ। कृपया वी.पी.पी. द्वारा स्वास्थ्य वाटिका के क्रंमाक 9,10 व 17 भेंजें।
रफीक अहमद,
रायपुर

डॉ. ममतानी जी नमस्कार।
आपको अखिल भारतीय परिषद में अवार्ड मिलने का विचार पढ़ा। आपको और डॉ. अंजू ममतानी जी को हमारे ओर से हार्दिक बधाई। आपकी सेवा का ही यह फल है। भगवान करे आपको इससे भी ज्यादा यश मिले। डॉ. आनंद पांगारकर, नेत्र रोग तज्ञ, नागपुर
डॉ. आनंद पांगारकर
नेत्र रोग तज्ञ, नागपुर

स्वास्थ्य वाटिका का अंक 29 मिला। बहुत ही शानदार पत्रिका है। अच्छे-अच्छे लेख, आयुर्वेद की सेवा एंव सामान्यजन के स्वास्थ्य-कल्याण के लिये लाभदायक पत्रिका है। इसका आकार, आर्कषक मुख पृष्ठ तथा श्रेष्ठ क्वालिटी के कागज के लिये बधाई। उच्चकोटि के लेखों, विद्वानों के अनमोल मार्गदर्शन, हास-परिहास, प्रतियोगिताओं आदि के समावेश के साथ पत्रिका अपने आप में संपूर्णता लिये हुए है।
श्री देवेन्द्र कुमार मिश्रा
छिंदवाड़ा
हृदय-भाव पीयूष
‘स्वास्थ्य वाटिका‘ पत्रिका में
छपते भांति-भंति के लेख...
मेरी बात न माने मित्र तो
फिर पत्रिका पढ़कर तू देख...
संपादकीय में छपते हैं
मानव कल्याण के शुभ भाव
पढ़ने से ही पढ़ जाता है
तन-मन पर सुखद प्रभाव...
सद्गुरु नानकदेवजी का
हर उद्बोधन है अच्छा लगता..
पालन इनका करने पर
पाप तन-मन का है जलता...
नर नारी के जीवन संबंधी
लेख पत्रिका में हैं छपते...
तरह-तरह के सुंदर भाव
पढ़ने को हमें है मिलते...
डॉ. जी. एम. व डॉ. अंजू ममतानी
पत्रिका के हैं संपादक...
और अधि. माधवदास हैं
इसके सच्चे मार्गदर्शक...
इन सबके श्री चरणों में
‘प्रेमी‘ करता शत्-शत् नमन...
‘स्वास्थ्य वाटिका‘ को पढ़कर देखो
जीवन में रहेगा अमन-चमन..।
श्री शिवकुमार श्रीवास्तव प्रेमी
प्रतापगढ़

मुझे आपकी पंचकर्म की पुस्तक बहुत पसंद आई इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं। मैंने आपकी यह स्वास्थ्य वाटिका पत्रिका मुरादाबाद रेल्वे स्टेशन (यू.पी) पर देखी परंतु वह प्रति बिक चुकी थी। अतः मुझे एक प्रति भेजने का कष्ट करें।
डॉ. सत्यदेवसिंह,
मुरादाबाद

आपकी जीकुमार आरोग्यधाम की स्वास्थ्य वाटिका पर नजर पड़ी और मैंने यह पुस्तक तुरंत रेलवे बुक स्टाॅल से खरीदी तथा इसके द्वारा जानकारी मुझे बहुत अच्छी लगी। इसी पत्रिका में मैंने ज्योतिष वाटिका का भी अध्ययन किया, अच्छा लगा। पत्रिका की दिन दूनी रात चैगुनी‘ उन्नति के लिए शुभकामनाएं।
पं. राजेन्द्र भार्गव, महैर
जि. सतना (म.प्र.)

मुझे कहीं से स्वास्थ्य वाटिका का पुराना अंक अक्टूबर-दिसंबर 2007 पढ़ने को मिला। पढ़कर बहुत उपयोगी पाया। आपका वात रोग विशेषांक उपल्बध हैं लिखें। पूज्य ममतानी साहब सीडी की क्या कीमत है। आपकी पत्रिका आगरा में कौनसा ऐजेंट मंगाता है लिखें।
अधि. मोतीलाल बत्रीया
आगरा
आपको पत्र लिखने का कारण यह है कि आपके द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘स्वास्थ्य वाटिका‘ मार्च 2008 का अंक पढ़ा। बहुत अच्छी ज्ञानवर्धक पत्रिका इसके संपादन के लिए आपको धन्यवाद।
आयुर्वेद पंचकर्म (बॉडी सर्विसिंग) कितने दिनों का होता है? जानकारी भेजने का कष्ट करें तथा विस्तृत जानकारी से अवगत कराएं।
मोहम्मद हबीब खान
मोहगावं, बालाघाट

स्वास्थ्य वाटिका का वात रोग विशेषांक मेरे मित्र ने पढ़ने हेतु दिया पढ़कर वात रोग संबंधी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। आयुर्वेद में वात व्याधि के 80 प्रकारों का विस्तृत विवेचन है। यह जानकर ज्ञान बढ़ा। अगला विशेषांक आप कौनसा व कब निकालने वाले हैं हमें अवश्य सूचित करें। स्वास्थ्य वाटिका के प्रत्येक अंक का बेसब्री से इंतजार रहता है।
श्रुति अग्रवाल,
इलाहाबाद

आदरणीय डॉ. ममतानीजी,
सादर वंदे!
पत्रिका नियमित मिल रही है। मेरे प्रति आपके आत्मीय भाव के लिये आभारी हूं। इलेक्ट्रानिक्स मीडिया के चकाचैंध में साहित्य, संस्कृति के संवाहक के रूप में आप और आपके सहयोगी जिस सम्पूर्ण भाव से पत्रिका के प्रकाशन का क्रम बनाये हुये हैं, वह निश्चय ही अभिनंदनीय है। कृपया मेरे वंदन - अभिनंदन स्वीकारें। आश्वस्त हूं, भविष्य में भी आपके आत्मीय भाव के संस्पर्श का सौभाग्य - सुख मुझे मिलता रहेगा।
कुशलता की कामना सहित, आपका अपना,
मधुप पांण्डेय कवि
नागपुर
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