इक्कीसवी सदी को अक्सर डिजिटल युग कहा जाता है। तकनीकी प्रगति ने मानव जीवन के हर क्षेत्र में गहरा प्रभाव डाला है। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवसाय, संचार, मनोरंजन और सामाजिक संपर्क-इन सभी क्षेत्रों में डिजिटल उपकरणों का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है। आज लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में कप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन या टैबलेट से जुड़ा हुआ है।

जहाँ एक और डिजिटल उपकरणों ने हमारे जीवन को अधिक सुविधाजनक, तेज और ज्ञानसम्पन्न बनाया है, वहीं दूसरी ओर इन उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता ने अनेक नई स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म दिया है। लंबे समय तक स्क्रीन का उपयोग आँखों, गर्दन, कंधे और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इन समस्याओं में से एक प्रमुख विकार है कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (Computer Vision Syndrome – CVS), जिसे आम भाषा में डिजिटल आई स्ट्रेन भी कहा जाता है।

अनुसंधानों से पता चलता है कि विश्व की लगभग 60%-70% आबादी, जो प्रतिदिन लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहती है. CVS के किसी-न-किसी लक्षण से प्रभावित है। यह समस्या केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है बाल्कि ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल गेम्स के कारण बच्चों और किशोरों में भी तेजी से बढ़ रही है। COVID-19 महामारी के दौरान जब वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेस आम हो गए, तब (US के मामलों में) और अधिक वृद्धि दर्ज की गई।

आधुनिक जीवनशैली का एक बड़ा पहलू यह है कि कार्य, शिक्षा और मनोरंजन तीनों ही स्क्रीन पर आधारित होते जा रहे है। पहले जहाँ आँखो को आराम मिल जाता था, अब लगातार स्क्रीन उपयोग के कारण आँखें तनावग्रस्त रहने लगी है। यही कारण है कि कंप्यूटर विजन सिंड्रोम को केवल नेत्र रोग न मानकर एक जीवनशैली विकार (Lifestyle Disorder) के रूप में देखा जाने लगा है।

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम क्या है?

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (CVS) या डिजिटल आई स्ट्रेन वह स्थिति है, जब लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने के कारण आँखो में असुविधा, थकान और दृष्टि संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती है। यह समस्या केवल कंप्यूटर उपयोग कर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि मोबाईल और टैबलेट उपयोग करने वाले बच्चों, युवाओं तथा वयस्कों में भी व्यापक रूप से देखी जा रही है।

इसे जीवन शैली विकार (Lifestyle Disorder) इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मुख्यतः हमारी कार्य शैली, आदतों और स्क्रीन उपयोग के तरीकों पर निर्भर करता है।

अन्य बीमारियों की तरह यह किसी संक्रमण या आनुवंशिक कारण उत्पन्न नहीं होती, बल्कि हमारे परिवेश और व्यवहार से गहराई से जुड़ी है।

कारण (Causes of computer vision syndrome)

1. अत्यधिक स्क्रीन समय (Excessive screen time)
लंबे समय तक कंप्यूटर, मोबाइल या टैबलेट पर काम करने से आँखो की मांसपेशियां थक जाती है। प्रतिदिन औसतन 6-10 घंटे स्क्रीन देखने से आँखों में निरंतर तनाव उत्पन्न होता है।

2. अनुचित बैठने की मुद्रा (Improper Posture)
यदि कंप्यूटर व स्क्रीन बहुत ऊँची या बहुत नीची हो या उपयोगकर्ता झुककर बैठता हो, तो आँखों को अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है। इससे न केवल आँखों में बल्कि गर्दन और कंधे में भी दर्द होता है।

3. नीली रोशनी का प्रभाव (Impact of Blue light)
डिजिटल उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) आँखो की रेटिना तक पहुंचकर हानिकारक प्रभाव डाल सकती है। लंबे समय में यह दृष्टि क्षमता को प्रभावित करती है।

4. पलक झपकाने की दर में कमी (Reduced Blinking rate)
सामान्य अवस्था में मनुष्य प्रति मिनट लगभग 15-20 बार पलक झपकाता है लेकिन स्क्रीन देखने समय यह दर घटकर 7-8 बार रह जाती है। परिणामस्वरूप आँखों में सूखापन और जलन होने लगती है।

5. दृष्टि दोष और गलत चश्मा (Refractirve error & Improper glasses)
यदि व्यक्ति को दूर या पास देखने में समस्या है और वह उचित चश्मे का उपयोग नहीं करता, तो स्क्रीन पर काम करते समय आँखो पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

6. पर्यावरणीय कारण (Environmental factors)
कम रोशनी वाले कमरे, स्क्रीन पर अधिक चमक (Glow), या एयर-कंडीशनर के कारण सूखी हवा भी CVS के प्रमुख कारणों में शामिल है।

निवारण एवं उपचार (Precaution & Management)

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन जीवनशैली में परिवर्तन और कुछ सावधानियाॅं अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

1) 20-20-20 नियम :- हर 20 मिनट के अंतराल पर 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना चाहिए। यह आँखो की मांसपेशियों को आराम देता है।
2) सही रोशनी और स्क्रीन पोजिशन :-  स्क्रीन को आँखो से 20-28 इंच की दूरी पर रखना चाहिए। स्क्रीन की ऊँचाई ऐसी हो कि उसका उपरी भाग आँखों के स्तर से थोड़ा नीचे हो।
3) नियमित नेत्र परीक्षण :- साल में कम से कम एक बार नेत्र परीक्षण कराना आवश्यक है। इससे दृष्टि दोष समय रहते पकड़ा जा सकता है।
4) डिजिटल डिटॉक्स :- प्रतिदिन कुछ समय मोबाइल और कंप्यूटर से दूर रहना चाहिए। परिवार और प्राकृतिक वातावरण में समय बिताना आँखो और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है।

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लिए आयुर्वेदिक उपाय

1) नेत्र तर्पण: यह आयुर्वेदिक नेत्र चिकित्सा पद्धति है जिसमें औषधीय घी (जैसे त्रिफला घृत या शतावरी घृत) को नेत्रों के चारों ओर बनायी गयी आटे की पट्टी में भरकर रखा जाता है। इसमे आँखो की थकान दूर होती है, दृष्टी शक्ति बढ़ती है और आँखे शीतल एवं तृप्त महसूस करती है।
2. नेत्र प्रक्षालन :- आँखो को त्रिफला क्वाथ या गुलाब जल से धोना। इससे नेत्रों में जमी हुई धूल, प्रदूषण और तनाव कम होता है।
3. त्रिफला का उपयोग :- त्रिफला चूर्ण का नियमित सेवन पाचन को ठीक करता है और दृष्टि को भी लाभ पहुँचाता है। त्रिफला घृत का प्रयोग विशेष रूप से आँखों के स्वास्थ्य हेतु लाभकारी है।
4. आहार संबंधी उपाय :- ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, आँवला और बादाम आँखो के लिए अत्यंत लाभकारी है। पर्याप्त जल का सेवन करना आवश्यक है।
5. योग और व्यायाम :-
* नेत्रों के लिए विशेष व्यायाम जैसे पल्मिंग अर्थात हथेलियों को रगड़कर गर्म कर बंद आँखो पर हल्के से रखकर आँखो को विश्राम देना, दूर की वस्तु देखना और गोल घुमाव (Clock wise & anticlockwise) उपयोगी है।
*प्राणायाम और ध्यान मानसिक तनाव को कम करते है, जिससे आँखो पर मी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

डॉ. अवन्ती ढेपे
पी.जी. स्कॉलर, शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय नागपुर

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