ओस्टियोपोरोसिस एक ऐसी खामोश बीमारी है, जो कि धीरे-धीरे शरीर की हड्डियों को कमजोर करने लगती है इसमें हड्डियों की मज्जा घटने लगती है और उनमें मौजुद छोटे-छोटे ऊतक फटने लगते हैं। इस प्रकार हड्डियों में फ्रैक्चर होने का खतरा लगातार बना रहता है। वैसे यह रोग अधिकतर उम्रदराज महिलाओं में पाया जाता है। हालांकि ओस्टियोपोरोसिस की शुरूआत जीवन में बहुत पहले ही हो जाती है, लेकिन इसके दुष्परिणाम देर से दिखते हैं। इसलिए यह सुझाया जाता है कि हमें शुरू से ही अपने आहार का ध्यान रखते हुए कैल्शियम व विटामिन डी का सेवन अधिक करना चाहिए ।
हड्डियों के विरल (थिनिंग) होने को ओस्टियोपोरोसिस कहते हैं हड़ियों के टिश्यू अनवरत नवीनीकृत होते रहते हैं नई हड्डियां पुरानी हड्डियों की जगह लेती रहती हैं 20 वर्ष की उम्र में बोन डेंसिटी शीर्ष पर होती है लेकिन 35 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियों का कमजोर होना शुरू होता है बोन डेंसिटी कई मर्तबा इतने निचले स्तर पर आ जाती है कि जरा सा गिर जाने पर भी हड्डियां टूट जाती हैं।
कारण
2) आनुवांशिक
3) निष्क्रिय जीवन शैली या व्यायाम कम करना
4) कृश (दुबली पतली) और छोटी शरीर रचना
5) आहार में कैल्शियम की कमी
6) विटामिन ‘डी’. धूप की कमी
7) कम उम्र में मासिक धर्म का बंद होना या मेनोपोज
8) धूम्रपान
9) अधिक मात्रा में मदिरा सेवन
10) कुछ बीमारियों में किडनी, लीवर के रोग, थायरॉइड, हायपर थायराडिसम, हायपर पैराथायराडिसम, कैंसर, आंतो की बीमारियों व गठियावात के रुग्णों को इस रोग का खतरा अधिक होता है। गैस्ट्रिक सर्जरी किए रोगी को ऑस्टियोपोरोसिस का आक्रमण हो सकता है।
11) कुछ दवाइयां स्टेराइड, अस्थमा, आर्थराइटिस, एपिलेप्सी की औषधि, नींद की गोलियां, कैन्सर की कुछ दवाइयां और कुछ हारमोन्स ।
12) माल न्यूट्रिशन (कुपोषण)
13) अति डाइटिंग (अतिअल्प आहार)
जीवनशैली से संबंध ?
महिलाएं व ऑस्टिओपोरोसिस
ओस्टियोपोरोसिस की वजह बनने वाले खतरे ?
लक्षण
ओस्टियोपोरोसिस से परेशानियां ?
ओस्टियोपोरोसिस से बचाव
कैल्शियम सप्लीमेंट्स
विटामिन डी के सेवन से कैल्शियम का अवशोषण बेहतर होता है और यह कुल मिलाकर हड्डियों को बेहतर बनाता है। विटामिन डी का कुछ हिस्सा हमें सूरज की रोशनी से मिलता है शरीर में कैल्शियम को खपाने के लिए विटामिन डी की आवश्यकता होती है। रोजाना धूप में 20 मिनट रहने से शरीर को आवश्यकता के अनुसार विटामिन डी मिल जाता है। साल्मन जैसी मछली, अंडे व कुछ प्रकार के अनाजों से भी विटामिन डी प्राप्त किया है। 50 से 70 वर्ष के लोगों को रोजाना 400-800 आई. यू तक विटामिन डी सेवन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन 2000 आई यू से अधिक विटामिन डी गुर्दों के लिए खतरनाक हो सकता है।रोकथाम के उपाय
2) नियमित व्यायाम से शरीर की हड्डियां व संधियां मजबूत रहती हैं।
3) अल्कोहल व धूम्रपान से परहेज-अल्कोहल, धूम्रपान से शरीर की कैल्शियम ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है।
4) चाय काफी का सेवन कम करें क्योंकि ये कैल्शियम के ग्रहण क्षमता को प्रभावित करते है।

आयु अनुसार कैल्शियम की आवश्यक मात्रा
2) ब्लड विटामिन डी
3) बोन मिनरल डेनसिटी टेस्ट (बी.एम.डी)

पंचकर्म
हड्डियों के विरल (थिनिंग) होने को ओस्टियोपोरोसिस कहते हैं हड़ियों के टिश्यू अनवरत नवीनीकृत होते रहते हैं नई हड्डियां पुरानी हड्डियों की जगह लेती रहती हैं 20 वर्ष की उम्र में बोन डेंसिटी शीर्ष पर होती है लेकिन 35 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियों का कमजोर होना शुरू होता है बोन डेंसिटी कई मर्तबा इतने निचले स्तर पर आ जाती है कि जरा सा गिर जाने पर भी हड्डियां टूट जाती हैं।
कारण
2) आनुवांशिक
3) निष्क्रिय जीवन शैली या व्यायाम कम करना
4) कृश (दुबली पतली) और छोटी शरीर रचना
5) आहार में कैल्शियम की कमी
6) विटामिन ‘डी’. धूप की कमी
7) कम उम्र में मासिक धर्म का बंद होना या मेनोपोज
8) धूम्रपान
9) अधिक मात्रा में मदिरा सेवन
10) कुछ बीमारियों में किडनी, लीवर के रोग, थायरॉइड, हायपर थायराडिसम, हायपर पैराथायराडिसम, कैंसर, आंतो की बीमारियों व गठियावात के रुग्णों को इस रोग का खतरा अधिक होता है। गैस्ट्रिक सर्जरी किए रोगी को ऑस्टियोपोरोसिस का आक्रमण हो सकता है।
11) कुछ दवाइयां स्टेराइड, अस्थमा, आर्थराइटिस, एपिलेप्सी की औषधि, नींद की गोलियां, कैन्सर की कुछ दवाइयां और कुछ हारमोन्स ।
12) माल न्यूट्रिशन (कुपोषण)
13) अति डाइटिंग (अतिअल्प आहार)
जीवनशैली से संबंध ?
महिलाएं व ऑस्टिओपोरोसिस
ओस्टियोपोरोसिस की वजह बनने वाले खतरे ?
लक्षण
ओस्टियोपोरोसिस से परेशानियां ?
ओस्टियोपोरोसिस से बचाव

कैल्शियम सप्लीमेंट्स

रोकथाम के उपाय
2) नियमित व्यायाम से शरीर की हड्डियां व संधियां मजबूत रहती हैं।
3) अल्कोहल व धूम्रपान से परहेज-अल्कोहल, धूम्रपान से शरीर की कैल्शियम ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है।
4) चाय काफी का सेवन कम करें क्योंकि ये कैल्शियम के ग्रहण क्षमता को प्रभावित करते है।
कैल्शियम एक महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ है जो हड्डियों व दाँतों की मजबूती के लिए आवश्यक है। भोजन में कैल्शियम का पर्याप्त प्रमाण होने से दांत व हड्डियां स्वस्थ रहती है। इतना ही नहीं मांसपेशियों को कार्यान्वित करने में मी कैल्शियम की अहम भूमिका है साथ ही कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है। कैल्शियम की कमी से बढ़ती उम्र में ऑस्टियोपोरोसिस रोग होने की आशंका रहती है। कैल्शियम के उत्तम स्त्रोत है दूध, दही, अनाज, दालें, चीज, पनीर, पत्तागोभी, हरी सब्जियां, सोयाबीन, बीन्स, बादाम, अंजीर आदि सूखे मेवे, अंकुरित अनाज, मेथी, गाजर, मटर, टमाटर, सेव, मछली, कॉडलीवर आइल आदि। साथ ही नियमित योगाभ्यास करें।आयु अनुसार कैल्शियम की आवश्यक मात्रा
2) ब्लड विटामिन डी
3) बोन मिनरल डेनसिटी टेस्ट (बी.एम.डी)

पंचकर्म
2) सर्वांग तैल धारा : वात नाशक तेल का प्रयोग तैल धारा हेतु किया जाता है, जैसे बला, निर्गुडी, पंचगुण तैल इत्यादि। इसमें रूग्ण को लिटाकर विशिष्ट पद्धति से पूर्ण शरीर पर तेल की धारा का सिंचन किया जाता है। यह प्रक्रिया 40 मिनट तक लगातार की जाती है। जिससे ऑस्टियोपोरोसिस के रुग्ण की हड्डियां मजबूत होकर दर्द से राहत मिलती है। इसी प्रकार जड़ी बूटी से निर्मित काढा या दूध से दी जानेवाली धारा को क्वाथ धारा या दुग्ध धारा कहा जाता है।
3) पिंड स्वेद : इसमें चावल, दूध व जड़ी बूटी का क्वाथ के एक साथ पकाकर उसकी पोटली बनाते हैं। यह पोटली कुनकुना क्याथ व दूध में मिगाकर रूग्ण के अंग पर चालीस मिनट तक मालिश करते हैं। इससे हड्डियां मजबूत होकर मांसपेशियों को भी शक्ति मिलती है।

डॉ. अंजू ममतानी
'जीकुमार आरोग्यधाम',
238, गुरु हरिक्रिशन मार्ग,
जरीपटका, नागपुर