आकर्षक खूबसूरत और युवा दिखने की चाहत हर स्त्री-पुरुष में शुरु से ही होती है। महिलाएं इस मामले में और भी जागरुक होती है। जब तक चेहरा तरोताजा और झुर्रियों व झाइयों रहित बना रहता है तब सबको आकर्षित करता है पर जैसे-जैसे हमारी उम्र बढती जाती है वैसे वैसे उस पर झुर्रियों और झाइयों का साम्राज्य होने लगता है। आइने में चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियों और झाइयों को देखकर वह अपने अंदर एकाएक वृद्धावस्था का अहसास करने लग जाता है।
मेलाज्मा एक सामान्य त्वचा संबंधी समस्या है, जिसमें चेहरे व गालों पर भूरे, काले या धूसर रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। यह समस्या मुख्य रूप से महिलाओं में अधिक देखी जाती है, खासकर गर्भावस्था के दौरान या हार्मोनल बदलाव के समय। हालांकि पुरुषों में भी यह समस्या हो सकती है. लेकिन इसका प्रतिशत कम होता है। मेलाज्मा को आम भाषा में “झाइयां” भी कहा जाता है।
मेलाज्मा क्या है ?
मेलाज्मा एक प्रकार का हाइपरपिग्मेंटेशन (त्वचा का गहरा होना) है, जो त्वचा में मेलेनिन (Melanin) नामक पिगमेंट की अधिक मात्रा के कारण होता है। यह आमतौर पर चेहरे के उन हिस्सों पर दिखाई देता है जो सूरज की रोशनी के संपर्क में अधिक आते हैं, जैसे- गाल, माथा, नाक, ऊपरी होंठ (upper lip) व ठुड्डी
यह कोई संक्रामक बीमारी नहीं है और न ही यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होती है लेकिन यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है।
मेलाज्मा के कारण
1. हार्मोनल बदलाव हार्मोनल परिवर्तन मेलाज्मा का सबसे बड़ा कारण है। विशेष रूप से गर्भावस्था (इसे “प्रेग्नेंसी मास्क” भी कहा जाता है), गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग, हार्मोन थेरेपी के कारण होता है।
2 सूर्य की किरणें (UV Rays): सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें मेलेनिन उत्पादन को बढ़ाती हैं, जिससे त्वचा पर काले धब्बे बन जाते हैं।
3. आनुवंशिक कारण यदि परिवार में किसी को मेलाज्मा है, तो इसकी संभावना बढ़ जाती है।
4. त्वचा की संवेदनशीलता कुछ लोगों की त्वचा अधिक संवेदनशील होती है, जो आसानी से पिग्मेंटेशन का शिकार हो जाती है।
5. कॉस्मेटिक उत्पाद घटिया या रसायनों से भरपूर ब्यूटी
प्रोडक्ट्स भी त्वचा को नुकसान पहुंचाकर मेलाज्मा का कारण बन सकते हैं।
मेलाज्मा के लक्षण
इनका कत्थई रंग दूर से ही झाइयों की उपस्थिति दर्शाता है। झाइयां पुरुषो की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक दिखायी देती है। झाइयों से मुक्ति पाने के लिए महिलाए ब्लीच करवाती है, इससे बदलाव तो दिखाई देने लगता है लेकिन यह अस्थायी होता है और कुछ समय उपरान्त ये झाइयां और गहरी दिखायी देने लगती है।
झाइयां मुख्यतः महिलाओं में मुख्यतः खून की कमी से होती है। महिलाओं में गर्भावस्था में आयरन की कमी व माहवारी के अनियमित होने से होती है। प्रसव, डायबिटीज, गर्भपात या मासिक धर्म में अधिक साव अथवा खूनी बवासीर आदि किसी वजह से या तो खून ज्यादा निकल जाता है अथवा खून कम बनता है तब अन्य समस्याओं के अलावा झाइयों की समस्या भी सामने आती है।
पुरुषो में मुख्यतः दवाइयों के साइड इफेक्टस के रुप में व पियूट्वरी ग्रन्थि के अनियमित स्राव से झाइयां उत्पन्न होती है। विभिन्न प्रकार के रसायन युक्त सौंदर्य प्रसाधन मार्केट में उपलब्ध है। इनके अत्याधिक प्रयोग से त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे झाइयां हो सकती है। झाइयों का उपचार शीघ्र कराना चाहिए अन्यथा इनके दाग हठीले बन कर स्थायी बन जाते है।

- चेहरे पर भूरे या काले रंग के धब्बे ।
- धब्बों का आकार अनियमित (irregular) होना।
- त्वचा का रंग असमान दिखाई देना।
- धब्बों में किसी प्रकार की खुजली या दर्द नहीं होता।
- यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और समय के साथ अधिक स्पष्ट हो सकती है।
मेलाज्मा का आधुनिक उपचार
मेलाज्मा का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित और कम किया जा सकता है।
1. सनस्क्रीन का उपयोग – SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन रोजाना लगाना जरूरी है। बाहर जाने से 20 मिनट पहले लगाएं। हर 2-3 घंटे में दोबारा लगाएं।
2. केमिकल पील (Chemical Peel) – इस प्रक्रिया में त्वचा की ऊपरी परत को हटाया जाता है, जिससे नई और साफ त्वचा सामने आती है।
3. लेजर उपचार – लेजर तकनीक से भी मेलाज्मा को कम किया जा सकता है, लेकिन यह महंगा होता है और हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होता।
उपचार
झाइयों के होने का प्रमुख कारण खून की कमी है अतः सर्वप्रथम रक्त में हीमोग्लोबिन की जांच कराएं। यह कम होने की दशा में भोजन में आयरन की मात्रा बढाएं। सौन्दर्य प्रसाधनों का प्रयोग कम से कम करें। यदि करे तो हर्बल प्रसाधनों का प्रयोग करना चाहिए। त्वचा को धूप से बचाएं। यदि आप बालो को रंगने के लिए हेयर डाय का प्रयोग करते है तो डाय के प्रयोग के एक या दो दिन बाद मेहंदी का लेप बालों में करे ताकि बालों में रसायनों का असर कम हो सके। चेहरे पर ब्लीचिंग का प्रयोग न करें। सेब का गूदा चेहरे पर मलने से झाइयां दूर होती है। बादाम की गिरी को रात में भिगोकर सुबह उसका छिलका उत्तार कर गिरी को पत्थर पर घिसकर एक चम्मच नींबू का रस व एक चम्मच शहद इसमें मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। आधे घंटे बाद इसे धो ले। ऐसा करने से झाइयों कम पड़ती है। जायफल को कच्चे दूध में घिसकर लगाने से झाइयां दूर होती है। ग्वारपाठे या ऐलोवेरा का गूदा गाय के दूध में मिलाकर झाईयों को लेप करना चाहिए। ताजे टमाटर काटकर उससे चेहरे पर मसाज करने पर भी झाइया कम होती है। एलोवेरा जेल, नींबू का रस (सावधानी के साथ), हल्दी और दही का मिश्रण, आलू का रस का प्रयोग करें।
मेलाज्मा से बचाव
मेलाज्मा से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं-
– धूप में जाने से बचें।
– हमेशा सनस्क्रीन का उपयोग करें।
– छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करें।
– हार्मोनल दवाओं का उपयोग डॉक्टर की सलाह से करें।
– त्वचा के अनुसार ही ब्यूटी प्रोडक्ट्स चुनें।
निष्कर्ष
मेलाज्मा एक सामान्य लेकिन जिद्दी त्वचा समस्या है, जो मुख्य रूप से हार्मोनल बदलाव और सूर्य की किरणों के कारण होती है। हालांकि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है। सही उपचार, नियमित देखभाल और धूप से बचाव के माध्यम से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
यदि समस्या अधिक बढ़ जाए, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) से परामर्श लेना सबसे बेहतर विकल्प होता है।

डॉ. अंजू ममतानी
'जीकुमार आरोग्यधाम',
238, गुरु हरिक्रिशन मार्ग,
जरीपटका, नागपुर