|| एक सच्ची झलक :- “30 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल मेरे पास अनिद्रा, थकान और चिड़चिड़ेपन के साथ आए। मेडिकल टेस्ट सामान्य थे। लेकिन उनकी दिनचर्या पूरी तरह असंतुलित थी- रात 2 बजे तक लैपटॉप पर काम, जंक फूड, और कोई व्यायाम नहीं। मैंने दवा शुरू करने के बजाय उन्हें जीवनशैली सुधार की सलाह दी। नियमित नींद, स्क्रीन-टाइम कम करना और रोजाना 30 मिनट पैदल चलना। केवल 4 हफ्तों में उनकी नींद सुधर गई, मूड स्थिर हुआ और कामकाजी क्षमता बढ़ गई। यह अनुभव हमें सिखाता है कि कभी-कभी सबसे बड़ी दवा हमारी जीवनशैली ही होती है।”

|| मानसिक स्वास्थ्य क्या है ? : विश्व स्वास्थ्यसंगठन (WHO) कहता है कि मानसिक स्वास्थ्य केवल मानसिक रोग का अभाव नहीं, बल्कि ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति अपनी क्षमताओं को पहचान सके, जीवन की चुनौतियों से निपट सके, उत्पादक रूप से कार्य कर सके और समाज में योगदान दे सके। यानी यह हमारे जीवन की गुणवत्ता का मूल आधार है।

भारतीय संदर्भ – बदलती जीवनशैली और मानसिक संतुलन हमारे समाज में पारंपरिक रूप से मानसिक स्वास्थ्य को सहारा देने वाले अनेक तत्त्व रहे हैं-संयुक्त परिवार, सामूहिक जीवन, धार्मिक और आध्यात्मिक साधनाएँ।
लेकिन आज शहरीकरण, प्रतिस्पर्धा, और 24X7 “कनेक्टेड” संस्कृति ने इस संतुलन को बिगाड़ दिया है।
युवा पीढ़ी सोशल मीडिया पर सक्रिय है, लेकिन असली भावनात्मक जुड़ाव से दूर होती जा रही है। इसी का परिणाम है तनाव, अवसाद और नींद की समस्याओं का बढ़ना।

|| विज्ञान क्या कहता है? :- हार्वर्ड स्टडी ऑफ एडल्ट डेवलपमेंट ने दिखाया है कि अच्छे रिश्ते ही दीर्घकालिक खुशी और स्वास्थ्य का सबसे बड़ा कारक हैं।
जिन लोगों की नींद बाधित रहती है, उनमें अवसाद और चिंता का खतरा 2-3 गुना बढ़ जाता है।
नियमित व्यायाम से एंडोर्फिन और BDNF जैसे रसायन निकलते हैं, जो मस्तिष्क को लचीला और स्थिर बनाते हैं। स्पष्ट है-मानसिक स्वास्थ्य केवल दवा से नहीं, बल्कि जीवनशैली से भी मजबूत होता है।

|| कार्यस्थल और मानसिक स्वास्थ्य
* आज का कार्यस्थल तनाव का प्रमुख स्रोत है।
* लगातार ऑनलाइन रहना ।
* लक्ष्य-आधारित दबाव ।
* छुट्टियों और आराम का अभाव
* इनसे बर्नआउट सिंड्रोम तेजी से बढ़ रहा है।
उपाय – काम-जीवन की सीमाएँ तय करें, सप्ताह में एक दिन डिजिटल डिटॉक्स करें, और “ना” कहना सीखें।

|| विशेष समूहों के लिए जीवनशैली सुझाव
छात्र :-
▶ नियमित नींद लें, परीक्षा के दिनों में भी।
▶ सोशल मीडिया सीमित करें।
▶ परीक्षा तनाव के लिए श्वसन व्यायाम अपनाएँ।
महिलाएँ :-
▶ गर्भावस्था और प्रसव के बाद मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें।
▶ रजोनिवृत्ति के दौरान जीवनशैली सुधार सहायक होता है।
▶ “स्वयं का समय’ निकालना आवश्यक है।

वरिष्ठ नागरिक :-
▶ हल्की शारीरिक गतिविधि बनाए रखें।
▶ सामुदायिक जीवन से जुड़ाव बनाए रखें।
▶ अकेलेपन से बचने के उपाय करें।

|| जीवनशैली ही सबसे बड़ी दवा :- मानसिक स्वास्थ्य कोई विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यकता है। हमारे चुनाव -नींद, व्यायाम, भोजन, रिश्ते और सीमाएँ तय करना – यही हमारे मन का भविष्य तय करते हैं।
याद रखिए-स्वस्थ मन ही सफलता, संतोष और संबंधों की असली नींव है। जीवनशैली को सँवारना ही मानसिक स्वास्थ्य की सबसे सरल और प्रभावी दवा है।

डॉ. हरकिशन ममतानी
मनोरोग विशेषज्ञ
प्रमुख, मनोवेद एम.बी.बी.एस. (जी.एम.सी, नागपुर), एम.डी. मनोरोग (निमहांस, बैंगलोर)
एम.आर.सी. साइक (यू.के.),
पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप न्यूरोसाइकियाट्री (निमहांस, बैंगलोर)
पूर्व वरिष्ठ निवासी चिकित्सक (एम्स, नागपुर)

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