श्री गुरू नानकदेवजी

संसार में मनुष्य जन्म दुर्लभ माना जाता है क्योंकि 84 लाख योनियों के पश्चात हमें मनुष्य जन्म प्राप्त होता है. अत अत्यंत सौभाग्य की बात है इस मानव देह का प्राप्त होना। ईश्वर ने हमें मनुष्य जन्म दिया है तो हमारा भी यह परम कर्तव्य है कि उस परमपिता परमेश्वर का गुणगान करे ताकि हमारा यह जन्म सफल हो। किंतु संसार में पदार्पण कर हम अनेक मायारूपी प्रपंचों में इस कदर उलझ जाते हैं कि परमात्मा का सिमरन करना भूल जाते हैं। ऐसे समय परमात्मा इस सृष्टि पर दैवीय शक्तियों सहित कोई अवतार / संत भेजता है, जो हमें समझाकर परमात्मा से जोड़े। भारत देश में अनेक संत-महात्माओं का अवतरण हुआ है. जिन्होंने आम आदमी का ईश्वर से नाता जोड़े रखा है तथा इस धरती से पाप को कम कर, पुण्य का संचार किया है। ऐसे ही संतों/अवतारों/महात्माओं में से एक संत है, श्री गुरु नानकदेवजी महाराज….!भाई गुरुदास अपनी बाणी में गुरु नानकदेवजी के अवतरण को इस तरह फरमाते हैं-

“सुणी पुकारि दातार प्रभु गुरु नानक जग माहि पठाइआ, कलि तारण गुर नानक आइआ”

अर्थात जब इस धरती पर पापों का बोझ अत्यधिक बढ़ गया, धरती मां पापों के बोझ को सहन न कर सकी, तब धरती मां ने गाय का रूप धारण कर अकाल पुरख परमात्मा को कातर स्वर में मदद के लिये पुकारा। परमात्मा ने धरती मां की पुकार सुनकर श्री गुरुनानक देवजी को इस संसार के जीवों का उद्धार करने व सत्कर्म की राह दिखाने के लिये कलियुग में अवतरित किया। श्री गुरुनानक देवजी ने इस संसार को कर्मकाण्डों से मुक्त कर परमात्मा के नाम से जोड़ा एवं जाति-पाति के भेद को मिटाकर चारों वर्णों में भाईचारा व सद्‌भावना प्रसारित कर, कलियुग में सतनाम के मंत्र का जाप करवाया।

भाई गुरदासजी समझाते हैं कि ‘सतिगुर नानक प्रगटिआ मिटी धुंध  जगि चानणु होआ।’ एक समय था जब संसार में चारों ओर माया विकारों व कर्मकाण्डों के रूप में अंधेरा छाया हुआ था, किसी को परमात्मा के नाम की सुध नहीं थी, सम्पूर्ण विश्व अंधियारे  में पड़ा हुआ था। ऐसे समय सतगुरु नानकदेवजी परमात्मा के नाम की रोशनी करने के लिये प्रकट हुए। जैसे सूरज के निकलने पर सभी तारे छिप जाते हैं वैसे ही सच्चे पातशाह के प्रकट होते ही जगत में सर्वत्र उजियारा हो गया लोगों ने पाखंडियों को मानना छोड़ दिया व जीव परमात्मा के नाम से जुड़ गये। घर-घर में परमात्मा के नाम का कीर्तन-गुणगान होने लगा। गुरुजी ने सम्पूर्ण विश्व का भ्रमण किया और सभी को धर्म के प्रति जागृत किया। अतः कलियुग में ‘गुरमुख’ प्रकट हुआ अर्थात् अंधेरे को दूर करने के लिये परमात्मा ने सतगुरु नानकदेव के रूप में अवतार लिया।

श्री गुरु नानकदेवजी का जन्म तलवंडी गांव (पश्चिम पाकिस्तान में स्थित नानकाणा साहिब) लाहौर से 60 मील दूर हुआ था। वह शुभ दिन कार्तिक पूर्णिमा संवत 1526 था। इस वर्ष उसकी समगणित तारीख 5 नवंबर 2025 है। उनके पिता का नाम श्री कालूराय, माता का नाम त्रिपता एवं बहन का नाम नानकी था।

‘भविष्य पुराण’ में स्पष्ट उल्लेख है कि कलियुग में श्री गुरु नानकदेवजी का अवतार होगा। श्री गुरुग्रंथ साहब के पृष्ठ 1390 में भी कहा गया है कि गुरुनानक आप सतियुग में वामन अवतार थे, त्रेतायुग में रघुवंश के राम अवतार थे, द्वापर युग में श्रीकृष्ण, जिन्होंने राजा उग्रसेन को सिंहासन दिया एवं कलियुग में स्वतः को श्री गुरुनानक देवजी, श्री गुरु अंगद देवजी, श्री गुरु अमरदासजी के नाम से प्रसिद्ध किया।

Vakil Saheb

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