जीवनशैली जन्य बीमारियां इस युग में बढ़ती जा रहीं है। इसके पूर्व ये महामारी का रूप ले लें, इनके रोकथाम के उपायों को सख्ती से अपनाना पड़ेगा। आम लोगों को जागरूक करना पड़ेगा और उनकी जीवन-शैली में सुधार लाकर उनसे उत्पन्न होनेवाली व्याधियों की रोकथाम करना पड़ेगा, अन्यथा आधे से ज्यादा हिंदुस्तान उम्र के पहले ही हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मोटापा, हाइपोथायरॉइडिज्म, फैटी लिवर, PCOS जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जायेगा ।
PCOS यह महिलाओं में होनेवाली व्याधि है जिसका अथ है पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम। इस रोग में अंडाशय में अधिक संख्या में अधपके अंडाणु (Eggs) बनने लगते हैं। इनमें से कोई भी अंडाणु Mature नहीं होता और Cyst के रूप में अंडाशय में जमा होने लगते हैं। फलस्वरूप अंडाशय का आकार बढ़ जाता है और बहुत सारी शारीरिक क्रियाएँ गड़बड़ होने लगती हैं। ऐसे ही लक्षणों का समूह PCOS कहलाता है।
PCOS के सामान्य लक्षण – मासिक धर्म का रुक जाना, अनियमित होना या अत्याधिक मासिक स्त्राव होना। चेहरे पर ठोडी और होंठों के ऊपर बाल आने लगना, मुँहासे आने लगना, सिर के बालों का झड़ना या पतला होना, शरीर का वजन बढ़ने लगना, गर्भधारण में कठिनाई होना हर महिला में उपरोक्त सभी लक्षण दिखें, ऐसा जरूरी नहीं, पर उनमें से कुछ लक्षण भी दिखें तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिये.
PCOS क्यों होता है ? – असंतुलित खान-पान, आराम तलब जीवन शैली, व्यायाम का अभाव, मानसिक तनाव और नींद की कमी।
कभी-कभी पारिवारिक इतिहास (Genetic) भी मिलता है लेकिन आज से 25 से 30 वर्ष पूर्व यह व्याधि बहुत ही कम पायी जाती थी और आज के युग में हर पाँच में से एक लड़की था महिला PCOS से ग्रस्त दिखाई दे रही है।
PCOS में आहार की भूमिका – अधिक वसा और कार्बोहायड्रेट्स युक्त भोजन करना। दिन भर कुछ न कुछ खाते रहना, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, होटल का खाना, कोल्ड ड्रिंक्स, मद्यपान, चाय, कॉफी, दुग्ध पदार्थ, तले- मुने मसालेदार पदार्थ, चॉकलेट, आइसक्रीम, बिस्किट, केक जैसे अधिक कैलोरी युक्त पदार्थों का सेवन करना। खाना खाने का कोई व्यवस्थित समय तय न होना। ये खान पान की आदतें इन्स्युलिन रजिस्टंस उत्पन्न करती हैं, जिसके कारण गर्दन, काँख में काली-मोटी रेखाएँ बनने लगती है और हारमोन्स में असंतुलन होकर PCOS उत्पन्न हो जाता है।
PCOS में विहार की भूमिका – दिनभर मोबाइल, टी.वी., लॅपटॉप पर बैठे रहना, व्यायाम कम करना, घर के सभी परिश्रम वाले कार्य मशीनों द्वारा किये जाना, कार्यालयों में भी कुर्सी पर घंटों बैठे रहना, रात्रि में समय पर न सोना, रात्रि अधिक समय तक जागते रहने पर भूख लग जाती है। जंक फुड खाना, सुबह देर से उठना, ये जीवन शैली PCOS व्याधि को बढ़ाती है।
मानसिक तनाव से PCOS में इजाफा – आज के दौर में बच्चों से लेकर बड़े तक सभी तनाव ग्रस्त रहते हैं। रात में नींद न आना, दिनभर सुस्त रहना, Stress Eating भी आज की पीढ़ी में आम बात है। तनाव का सीधा असर हमारे हारमोन्स पर पड़ता है और PCOS के साथ-साथ हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड रोग उत्पन्न होने लगते हैं।
क्या PCOS खतरनाक है? – नहीं PCOS खतरनाक या जानलेवा तो नहीं है, परंतु इसके बाद मोटापा, थायरॉइड डिज़िज, बंध्यत्व, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, लिवर के रोग, हृदय रोग, चिंता, अवसाद, अंतरंग समस्याएँ घेरने लगती हैं।
PCOS पर नियंत्रण पाने के उपाय – संतुलित आहार-आयुर्वेद के आचार्यों ने भोजन में छः प्रकार के रसों से युक्त संतुलित थाली का उल्लेख किया है। व्यवस्थित प्रमाण में Macronutrients – कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटिन, फैट और Micronutrients – खनिज, विटामिन्स इनका भोजन में –
उचित प्रमाण होना आवश्यक है। आजकल की युवा पीढ़ी जो जिम जाते हैं, वे बहुत ज्यादा प्रोटीन्स लेते हैं। किंतु अपनी पचन शक्ति के अनुसार अपने काम करने के Type के अनुसार, अपने वातावरण के अनुसार अपना खान-पान Select करना चाहिये। PCOS से ग्रस्त महिलाओं को तैलीय, मीठा, दूध से निर्मित पदार्थ सेवन कम करके फल, सलाद, सब्जियों, साबुत अनाज का प्रयोग अधिक करना चाहिये।
विहार – अपनी उम्र में शक्ति के अनुसार योगासन, एरोबिक्स Outdoor Games, Running. Walking. Jogging, नृत्य आदि का उपयोग करना चाहिये। जिनका काम एक स्थान पर लंबे समय तक बैठने का होता है, उन्हें हर घंटे पश्चात् दस मिनिट का ब्रेक लेकर चहल कदमी, Stretching करना चाहिये। दिन में सोना बंद और रात में समय पर सोना चाहिये। प्राणायाम, योगनिद्रा, ध्यान नियमित रूप से करने पर तनाव कम होता है, नींद की क्वालिटी सुधरती है, शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है। अपनी हॉबीज़ को करने के लिये समय निकाले, जैसे गायन, नृत्य, सैर, घूमना, बागवानी, पेंटिंग, कुकिंग आदि। प्रकृति के निकट रहने से भी तनाव कम होकर मन प्रसन्न हो जाता है। अपने मित्रों, संबंधियों के पास रहने पर बातें करने पर भी तनाव कम हो जाता है।
PCOS पर औषधियां – PCOS के लक्षण अलग-अलग महिलाओं में अलग-अलग होते हैं और अलग-अलग समय पर बदलते भी रहते हैं। इसलिये कोई एक औषधि फॉर्मूला या उपाय इनके इलाज में सफल नहीं हो सकता है। हर एक रुग्णा की जाँच, रक्त की परीक्षण, सोनोग्राफी, वजन, BMI आदि के द्वारा परीक्षण करके तदनुसार चिकित्सा व्यवस्था बनानी पड़ती है। PCOS के निदान में रक्त परीक्षण और सोनोग्राफी अत्यावश्यक होता है। PCOS की स्थूल रुग्णा और कृश रुग्णा का इलाज अलग-अलग होता है। मासिक स्त्राव कम या ज्यादा होने पर औषधि अलग-अलग होती है। पिरीयड रुक जाने पर या अधिक बार होने पर चिकित्सा अलग देनी पड़ती है। अतः चिकित्सक का परामर्श आवश्यक होता है।
कुछ औषधियों जैसे अशोक, लोध्र, शतावरी, घृतकुमारी, लताकरंज, गुग्गुल, वृक्षाम्ल, कुबेराक्षादि वटी, आरोग्यवर्धनी वटी, कांचनार गुग्गुल, अशोकारिष्ट, दशमूलारिष्ट, त्रिफला चूर्ण, कुमारीआसव ये दवाईयां चिकित्सक की सलाह के पश्चात् ले सकते हैं। चेहरे पर बाल आने की समस्या होने पर सौंदर्य विशेषज्ञ की सलाह लेकर इस समस्या से निजात पायी जा सकती है।

डॉ. संगीता जैन गुप्ता
नागपुर M.D., आयुर्वेद M.R.A.V. (पंचकर्म) नागपुर