सफल व्यक्ति कुछ अलग काम नहीं करते बल्कि उनके काम करने का तरीका अलग होता है। कहने का मतलब यह है कि तरीके में बदलाव लाकर सफलता पाई जा सकती है । प्रस्तुत हैं ऐसी सलाहें जो आपकी जिंदगी को खुशगवार बनाने में सहायक सिद्ध होंगी ।
अपनी सोच को सकारात्मक बनाएं
जब आपका आत्मविश्वास डगमगाने लगे, तो इसे मजबूत करने के लिए सकारात्मक सोच का सहारा लें। घर की दीवार पर ये लिखें- मेरा आज ही मेरा आने वाला कल यानी भविष्य है और मैं अपने भविष्य का निर्माता स्वयं बनूंगा। मैंने जो सोचा है, एक दिन जरूर उसे पूरा कर दिखाऊंगा। उठते-बैठते-सोते-जागते जब ये शब्द आपकी निगाह के सामने होंगे, तो आपको एक नई प्रेरणा मिलेगी। आपको खुद महसूस होगा कि आपका जोश व उत्साह दिन-ब-दिन घटने के बजाय, बढ़ता जा रहा है।
पहले तौलें फिर बोलें
जो लोग ज्यादा बोलते हैं, बेवजह बोलते ही रहते हैं, उनकी शारीरिक ऊर्जा बेवजह खर्च होती रहती है। ज्यादा बोलने वालों से लोग चिढ़ भी महसूस करते हैं। फिर बेवजह और ज्यादा बोलने वाले लोग जाने-अनजाने कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं, जो उन्हें नहीं कहनी चाहिए और जो उनके शत्रु भी बना सकती है। महात्मा गांधी ने कहा है कि मौन सबसे बड़ी तपस्या है। यदि आप खुद कम बोलें और दूसरों की बातें ज्यादा सुनें, तो आपको दूसरों की खामियां और खूबियां आसानी से पता चल सकती हैं।
समय के प्रति सचेत रहे
वक्त गवाह है कि वक्त की पाबंदी के कायल लोगों की हमेशा जीत हुई है। जरा सोचिए, अगर वक्त पर सूरज न निकले, रात और दिन न हो, ठंड, गर्मी और बरसात न हो, तो क्या इस दुनिया का अस्तित्व बरकरार रह पाएगा? इसलिए समय पर सारे काम निपटाने की आदत डालें।
डायरी लिखें
शिकागो यूनिवर्सिटी अमेरिका में मनोरोग विभाग से जुड़े प्रोफेसर डॉक्टर शारदानंद रस्तोगी कहते हैं कि किसी बुद्धिजीवी के लिए डायरी से अच्छा मित्र और कोई नहीं हो सकता। अपने एक प्रयोग के तहत उन्होंने 40 ऐसे स्त्री-पुरुषों को चुना, जो अपनी बिगड़ती मानसिक स्थितियों के लिए स्वयं जिम्मेदार थे और इस वजह से आत्महत्या तक का इरादा बना चुके थे। प्रोफेसर रोबिंस ने उन्हें अपनी देखरेख में एक माह तक रखा और उन्हें सलाह दी कि वे अपनी दिनभर की दिनचर्या तथा पूरे दिन भर मस्तिष्क में उमड़ने-घुमड़ने वाले विचारों को रोज रात को डायरी में नोट करें। फिर दूसरे दिन उन नोट किए गए पन्नों पर लिखी गई एक-एक बात का मनन करें तथा उसके बारे में खुद से सवाल-जवाब करें। उन 40 लोगों ने एक माह तक ऐसा ही किया और एक माह बाद नतीजा यह आया कि वे सब के सब आत्महत्या का इरादा छोड़ चुके थे। प्रयोगो से यह भी साबित हुआ कि दूसरों की लिखी हुई बातों से खुद की लिखी हुई बातें सोचने पर ज्यादा मजबूर करती हैं। डायरी के रूप में एक तरह से आपका व्यक्तित्व ही आपके सामने होता है, जैसे एक-एक मसले पर आप इत्मीनान से गौर कर सकते हैं।
जल्दबाजी न करें
एक पुरानी कहावत है कि जल्दी का काम शैतान का। जल्दबाजी में किए गए फैसले हमेशा नुकसानदेह होते हैं। कोई भी काम अगर आप सब्र और तसल्ली से करेंगे, तो आप उसे पूरी गंभीरता, लगन, मेहनत और प्लानिंग से कर पाएंगे, इस तरह उसमें सफलता मिलने की पूरी संभावना रहेगी।
खुद को छलना ठीक नहीं
दूसरों के सामने अपने बारे में बड़ी-बड़ी बातें हांकना, अपनी शिक्षा, काबिलियत, नौकरी और घर-परिवार के बारे में झूठी तारीफें करके यदि आप यह सोचते हैं कि खुद की इमेज बना रहे हैं, तो आप गलत सोचते हैं। सच पूछिए तो ऐसा करके आप दूसरों को नहीं खुद को धोखा दे रहे हैं। आपकी बातों का मजा लेने के लिए लोग आपके मुंह पर भले ही आपकी तारीफें करते हैं, पर हकीकत यह है की पीठ पीछे वही लोग आपका मजाक उड़ाते हैं। माना कि आज के जमाने में मैन्यूपुलेशन के बगैर काम नहीं बनता, इसलिए कुछ मामलों में थोड़ा-बहुत झूठ से काम लेना पड़ सकता है। पर इसका सहारा आटे में नमक वाली तर्ज पर ले, नमक में आटे वाली तर्ज पर नहीं और याद रहे आपके किसी झूठ से किसी का नुकसान न हो।
टाइमपास न करें
टाइमपास की इस आदत को छोड़ दीजिए। इस आदत के चलते आप जो वक्त यूं जाया कर देते हैं, उस वक्त में आप कोई काम करके उसका लाभ उठा सकते हैं, अपने कैरियर ग्राफ को ऊपर उठा सकते हैं। यह बात हमेशा याद रखें कि वक्त उन्हीं की कद्र करता है, जो वक्त की कद्र करते हैं।
अधूरा ज्ञान नुकसानदेह है
अगर आप पेंटर है तो बेहतर होगा कि इसी क्षेत्र में अपने आपको इतना माहिर बना लें कि दुनिया में नाम हो जाए। आपके लिए यह बिल्कुल उचित नहीं कहा जा सकता कि आप दो चार बड़े लेखकों की किताबें पढ़ लें और चल पड़े लेखन के क्षेत्र में हाथ आजमाने। फिर कुछ दिनों बाद ज्योतिष की दो-चार किताबें पढ़कर खुद को ज्योतिषी समझ बैठे और अपने इस अधकचरे ज्ञान को अमली जामा पहनाते हुए लोगों का भविष्य बताने के नाम पर उन्हें गुमराह करने लगें। इस अधकचरे ज्ञान से न तो आपका ही भला होगा और न ही दूसरों का।
अभिमान को अलविदा कहिए
किसी विद्वान ने कहा है कि स्वाभिमान मनुष्य को जितना ऊपर उठा सकता है, अभिमान उसे उत्तना ही नीचे गिरा देता है। जब भी आपको ऐसा महसूस हो कि किसी काम से आपकी प्रतिष्ठा पर आंच आ रही है, और आपका स्वाभिमान दांव पर लगा हुआ है, तो अपनी आत्मा की आवाज सुनें। एकांत में बैठकर खुद से यह सवाल पूछे कि आप जिसे अपना स्वाभिमान समझ रहे हैं, क्या वास्तव में वह आपका स्वाभिमान ही है? कहीं यह आपका अभिमान घमंड या अहम् तो नहीं? पूरी ईमानदारी से खुद से यह प्रश्न करने पर आपको इसका जवाब मिल जाएगा और आप वक्त रहते संभल जाएंगे।
आपा न खोएं
कई मामलों में देखा गया है कि कुछ लोग अपने ऑफिस में हुए किसी फैसले (भले ही वह फैसला गलत हो रहा हो) को लेकर आवेश में आ गए और फौरन उत्तेजनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त कर बैठे। नतीजा यह हुआ कि उनकी नौकरी तक पर बन आई। घर हो या बाहर, ऑफिस हो या आपका बिजनेस कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब कोई बात आपके दिल को चोट पहुंचा देती है। ऐसी स्थिति में अपना आपा न खोएं। इस बात को भी न भूलें कि उत्तेजनापूर्ण तरीके या गुस्से में व्यक्त की गई आपकी सही प्रतिक्रिया का भी लोगों पर उल्टा असर पड़ सकता है और आपकी सारी बाजी उलट सकती है और शांतिपूर्ण ढंग से लेकिन कायदे से कही गई आपकी संक्षिप्त बात का भी गहरा असर पड़ सकता है।शुरुआत से पहले सोचें
अच्छी शुरुआत ही आधी सफलता की निशानी होती है। इसलिए काम कोई भी हो सबसे पहले तो आप उसके उद्देश्य पर ध्यान दें और उसका विश्लेषण करें कि यह किस हद तक आपके हित में है, उसे करने से आपको कितना सुखद अनुभव होगा, उससे आपको फायदा कितना और किस रूप में होगा।
अपना हाथ जगन्नाथ
बड़े-बुजुर्गों ने कहा है कि ऊपरवाला भी उसकी मदद नहीं करता जो खुद अपनी मदद नहीं करता। आप हमेशा इस बात को ध्यान में रखिए कि इस दुनिया में खुद के सबसे बड़े मित्र, हितैषी, हमदर्द, हमनवां सब आप खुद हैं। जिस दिन से आपने ऐसा सोचना शुरू कर दिया आपकी आंखें बाहर की दुनिया देखने के साथ-साथ आपके अंदर की ओर भी झांकने लगेंगी। आपका जमीर जाग उठेगा और आप हर कदम फूंक-फूंककर रखेंगे। कुछ ही दिनों में अपने- आप में आपको एक जादूई परिवर्तन नजर आएगा। एक ओर जहां आलसीपन आपसे कोसों दूर भाग जाएगा, वही आपकी शारीरिक व मानसिक शक्तियों का भी विकास होगा। अपने-आप में आपको खुद एक नई ऊर्जा का अहसास होगा।
हीनभावना त्यागें
हीनभावना के चलते कोई काम सामने आते ही घबरा जाना या अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा वाली तर्ज पर काम करना, ये दोनों ही बातें उचित नहीं कहीं जा सकती। इतिहास गवाह है कि अपने आप पर विश्वास रखकर और अपनी काबिलियत को सही तरीके से आंककर जिसने भी कोई काम किया है, उसे उस काम में सफलता मिली है। यदि आपका इरादा नेक है, तो यकीनन आपको कामयाबी मिलेगी। बस जरूरत है सच्ची लगन, मेहनत और समर्पण की। यह आत्मविश्वास का ही चमत्कार है कि डूबते लोग तिनके का सहारा लेकर पार लग जाते हैं।
महत्वाकांक्षी बने
हमेशा यह सोचिए कि आपके शरीर में इतनी ताकत है कि आप नामुमकीन से नामुमकिन लगने वाले कामों को भी अंजाम दे सकते हैं। नेपोलियन की तरह आपकी डिक्शनरी में भी असंभव शब्द नहीं है और आपको जिंदगी में जरूर ऐसा कुछ कर दिखाना है, जिससे भविष्य में आपका नाम हो। यदि आप ऐसा सोचते हैं, तो यकीनन ये ख्यालात आपको उस दायरे से ऊपर उठाएंगे, जिसमें कैद होकर आप सिर्फ खाने, कमाने तक ही सीमित रहते हैं। आपको चाहिए कि आप अखबारों और मैगजीनों में प्रकाशित होने वाले उन उद्योगपतियों, कलाकारों व अन्य हस्तियों के संस्मरण व जीवनियां पढ़े, जिन्होंने मामूली परिवार में जन्म लेकर अपने महत्वाकांक्षाओं व मेहनत के बलबूते पर नाम कमाया।
हंसे-हंसाएं, विनोदी स्वभाव के बनें
मनोवैज्ञानिकों की राय है कि जो लोग हताश और निराश रहते हैं वे अपनी जिम्मेदारियां को ठीक ढंग से नहीं निभा पाते, क्योंकि वे लोग अपनी जिम्मेदारियां को लेकर उतने सीरियस नहीं होते जितने कि खुद के हाल-बेहाल को लेकर सीरियस या यूं कहें कि फिक्रमंद रहते हैं। न्यूजर्सी, अमेरिका के चर्चित लॉफ्टर रेमेडी क्लिनिक के डॉक्टर पौल मेघी कहते हैं, जहां खिलखिला कर हंसने की घड़ी आए, वहां शर्मा कर या मन मसोस कर न रह जाएं, बल्कि खुल कर हंसे। दिल से निकली हंसी न सिर्फ मूड को और अच्छा बनाती है, बल्कि हमारे इम्यून सिस्टम को ताकत भी देती है। यह शरीर में स्ट्रेस हार्मोन के स्तर को कम करती है और दर्द से राहत दिलाती है और यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि खुशमिजाज लोग कम बीमार पड़ते हैं। इसलिए सदा खुश रहने की कोशिश करें।
दोस्ती का दायरा बढ़ाएं
अध्ययन बताते हैं कि दूसरों से जल्दी घुलने-मिलने वाले लोग खुशमिजाज और सुखी रहते हैं, क्योंकि वे अपना सुख-दुख दोस्तों में बांटते रहते हैं, जबकि अपने ही दायरे में जीने वाले अंदर ही अंदर कुढ़ते और डिप्रेस्ड होते रहते हैं। अध्ययन बताते हैं कि जिन लोगों के जिगरी दोस्त ज्यादा होते हैं, वे अपनी भरपूर और संपूर्ण जिंदगी जीते हैं, जबकि कुढ़-कुढ़ कर जीने वालों की उम्र के 10 साल कम हो जाते हैं। पर सिर्फ दोस्त अथवा साथी है, इसलिए हर किसी को दोस्त मत बनाइए। सोच-समझकर खुशहाल और खुशमिजाज लोगों से दोस्ती करने की कोशिश करिए। यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया की ब्रेन-बिहेवियर लेबोरेटरी में हुई रिसर्च से पता चला कि खुशमिजाज लोग जिनके चेहरे खिले रहते थे और लबों पर मुस्कराहट तैरती रहती है, उनके बांयें मस्तिष्क का अगला हिस्सा ज्यादा सक्रिय रहता है जिसकी वजह से उनमें रचनात्मक विचार आते हैं और उनका मूड हमेशा अच्छा रहता है।
शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज न करें
नींद पूरी न होने से मन खिन्न रहता है, इसलिए भरपूर नींद ले। भूखे पेट न रहें। लोग डाइटिंग के चक्कर में खाना बिलकुल छोड़ देते हैं। भूखे रहने से शरीर को कम कैलोरी मिलती है, जिसकी वजह से बदन में कमजोरी महसूस होने लगती है और मस्तिष्क पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है, आप हमेशा तनाव में रहने लगते हैं, तबीयत बुझी-बुझी सी लगती है। जो लोग नियमित रूप से कसरत करते हैं वे लोग कम डिप्रेस्ड होते हैं, उन्हें बेचैनी कम होती है और गुस्सा कम आता है।
जबकि जो लोग गाहे-बगाहे कसरत करते हैं, उनमें थकान, झल्लाहट, चिड़चिड़ापन आदि शिकायतें देखी जा सकती हैं। कसरत शुरू करने से पहले खूब पानी पिएं। ताकि शरीर का निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) न हो जाए। रोज कम से कम सात-आठ गिलास पानी तो पीना ही चाहिए। देखा गया है कि जो लोग कम पानी पीते हैं, वे नाखुश रहते हैं, जबकि जो लोग खूब पानी पीते हैं, वे खुश नजर आते हैं, क्योंकि पेशाब और पसीने के जरिए उनके शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते रहते हैं।

डॉ. हनुमान प्रसाद उत्तम
आयुष्मान, प्लॉट नं. - 7, सी. ओ. डी. कालोनी रोड,
कोयला नगर (बाई पास रोड), कानपुर नगर - 208011