स्नेही पाठकगण, प्रणाम….!
प्रिय पाठकों,
हमारी पत्रिका को प्रकाशित करते हुए लगभग २० वर्ष पूरे हो गए हैं। यह यात्रा आपके विश्वास और स्नेह से ही संभव हुई है। इस अंक में हम एक ऐमे विषय पर चर्चा करना चाहते हैं जो आज हर घर की चिंता बन गया है। लाइफस्टाइल डिसऑर्डर।
आज का इंसान अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वाथ्य को अक्सर पीछे छोड़ देता है। देर रात तक जागना, अनियमित भोजन, जंक फूड की आदत, व्यायाम की कमी और लगातार मानसिक तनाव- ये सब धीरे-धीरे हमारे शरीर को बीमारियों का घर बना देते हैं। मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉयड जैसी समस्याएँ अब सिर्फ बड़े लोगों में नहीं, बल्कि युवाओं और बच्चों में भी दिखाई देने लगी हैं।
आयुर्वेद कहता है कि दिनचर्या (Dally Routine) और ऋतुचर्या (Seasonal Routine) को जीवन का हिस्सा बनाना ही दीर्घकालीन स्वास्थ का आधार है। अगर हम सुबह जल्दी उठें, हल्का व्यायाम करें, मौसमी फल-सब्जियों खाएँ, समय पर भोजन और पर्याप्त नींद लें। तो न सिर्फ बीमारियों से बच सकते हैं बल्कि जीवन में संतुलन भी बनाए रख सकते हैं।
यह संपादकीय केवल जानकारी भर नहीं, बल्कि एक सीख है-आपका स्वास्थ्य आपके हाथ में है। कोई दवा, कोई डॉक्टर, कोई अस्पताल उतना प्रभावी नहीं हो सकता जितना आपका नियमित और अनुशासित जीवन । छोटे-छोटे बदलाव, जैसे रोज आधा घंटा टहलना, भोजन में अधिक सब्जियों और फल शामिल करना, स्क्रॉन टाइम घटाना और परिवार के साथ समय विताना ये सब बड़ी बीमारियों से रक्षा कर सकते हैं।
दीपावली का त्यौहार आने वाला है। यह रोशनी का पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की प्रेरणा देता है। क्यों न इस बार हम न केवल अपने घरों में दीप जलाएँ, बल्कि अपने जीवन में भी स्वास्थ्य और अनुशासन की ज्योति प्रज्वलित करें।
आप सभी को धन्वन्तरी जयंती, दीपावली व गुरुनानक जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।
स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें।

डॉ. जी. एम. ममतानी
एम. डी. (आयुर्वेद पंचकर्म विशेषज्ञ)
238, गुरु हरिक्रिशन मार्ग, जरीपटका, नागपुर