आज के समय में टैटू बनवाना एक फैशन और आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम बन गया है, खासकर युवाओं के बीच इसका चलन तेजी से बढ़ा है। हालांकि टैटू देखने में आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन इसके कुछ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। टैटू बनवाने की प्रक्रिया में त्वचा की ऊपरी परत को बार-बार सुई से छेदा जाता है, जिससे संक्रमण और एलर्जी का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, कुछ स्याही (इंक) में मौजूद रसायन त्वचा के लिए हानिकारक हो सकते हैं और लंबे समय में त्वचा संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। यदि स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए, तो गंभीर संक्रमण का खतरा भी हो सकता है। इस विषय में हम जानेंगे कि टैटू बनवाने से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है और इससे जुड़े संभावित नुकसान क्या हैं।

ये तो आपको भी पता है कि टैटू आजकल के युवाओं में एक तरह का स्टाइल स्टेटमेंट बनता जा रहा है। आजकल के युवा अपने शरीर पर तरह-तरह के टैटू बनवाते है। टैटू बनवाने में और भी कई तरह के डर और समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। जब कोई टैटू बनवाता है उस समय ज्यादा विचार नहीं करता है। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है कि टैटू से गंभीर बीमारियों की आशंका के अलावा त्वचा पर लालिमा, सूजन, मवाद आने के साथ दर्द होना, त्वचा का संक्रमण आदि हो सकते हैं। इसके अलावा इससे जीवाणुओं का संक्रमण होने का भी डर रहता है. टैटू बनवाने में सावधानी बेहद आवश्यक है, यहाँ तक कि यदि आप नकली टैटू बनवाना चाहते हैं तो भी आपको सावधान रहने की जरुरत है क्योंकि इससे आपके त्वचा पर एलर्जी जैसी समस्या हो सकती है।

टैटू बनाने की विधी

त्वचा को अलकोहल और आयोडिन से साफ किया जाता है। टैटू डिजाइन त्वचा पर बनाया जाता है। अधिकतर व्यवसायिक टैटू डिजाइनर हाथों में पकड़ी जा सकने वाली बिजली से चलने वाली मशीनों से इंक लगाकर टैटू बनाते हैं। नीडल बार में कई सुईयां लगी होती है। जो ऊपर-नीचे होती रहती है, प्रति मिनट 50 से 3000 बार तक यही सूईयां त्वचा में पिग्मेंट को पहुंचाती हैं। त्वचा में किए गए छेद की गहराई एक से चार मिलीमीटर होती हैं। गोवा व बैंकाक में टैटू बनाने के पूर्व व्यक्ति को बीअर पिलाई जाती है ताकि सुई चुभने का दर्द न हो।

टैटू के दुष्प्रभाव

टैटू दिखने में तो बहुत आकर्षक लगते हैं लेकिन इसके दुष्प्रभाव बहुत है। टैटू से सिर्फ इंफेक्शन, स्किन एलर्जी ही नहीं बल्कि इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

चर्म रोग और कैंसर

दरअसल टैटू बनाते समय जब एक व्यक्ति की नीडल दूसरे व्यक्ति पर इस्तेमाल की जाती है तब चर्म रोग, हेपेटाइटिस और एचआईवी जैसी संक्रमित बीमारियों के होने का खतरा है, यहाँ तक कि टैटू बनवाने से त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ सकता है लेकिन फिर भी शरीर पर तरह-तरह के टैटू बनवाने का चलन युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है।

विषैले तत्वों से खतरा

टैटू बनाते समय प्रयोग की जाने वाली स्याही में कई तरह के विषैले तत्व मौजूद होते हैं, जिनसे त्वचा कैंसर का खतरा बना रहता है. इसमें इनऑर्गेनिक मेटेलिक साल्ट्स, विभिन्न किस्म के ऑर्गेनिक मॉलेक्यूल्स और ऑर्गेनिक डाय होते हैं। टैटू बनाने वालों द्वारा प्रयुक्त नीले रंग की स्याही में कोबाल्ट और एल्यूमिनियम होता है, जबकि लाल रंग की स्याही में मरक्यूरियल सल्फाइड और दूसरे रंगों की स्याहियों में शीशा, कैडमियम, क्रोमियम, निकल, टाइटेनियम और कई तरह की दूसरी धातुएं मिली होती हैं। इन तत्वों से त्वचा पर एलर्जी उत्पन्न होने का खतरा रहता है।

क्या कहती है रिसर्च

एक शोध के अनुसार टैटू में इस्तेमाल होने वाली स्याही का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। स्याही (Ink) में मौजूद विषैले सुक्ष्मतत्व (Micro Toxic Particles) त्वचा (Skin) के माध्यम से बॉडी के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। इसका प्रभाव सिर्फ तात्कालिक ही नहीं, बल्कि लंबे समय में देखने को मिल सकता है।

Journal Scientific Reports में जर्मनी और फ्रांस के वैज्ञानिकों ने बताया कि Research के दौरान लोगों के टैटू को उन्होंने X-ray Fluorescence के जरिये जब देखा तो उन्हें Titanium Dioxide के सुक्ष्मतत्व (Micro Particles) दिखाई दिए। Titanium Dioxide सफेद (White) और रंगीन (Colour) टैटू दोनों में पाया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि टैटू हटवाएंगे तो भी त्वचा पर मौजूद स्याही के कण (Particles) को ही इकट्ठा किया जाएगा। ऐसे में शरीर में जा चुके सुक्ष्मतत्व (Micro Particles) के प्रभावों का खतरा बना रहता है।

नए अध्ययन के अनुसार टैटू में प्रयोग की जानी वाली स्याही के ये कण 100 नैनोमीटर से भी छोटे सूक्ष्म होते है। शरीर के अन्य हिस्सों में खतरनाक साबित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने इसके चलते कैंसर जैसी बीमारी के खतरे की संभावना भी जताई है। हालांकि इस अध्ययन के परिणामों को बेहतर तरीके से समझने के लिए और शोध की जरूरत है।

मांसपेशियों को नुकसान

टैटू बनाने से हमारे शरीर की त्वचा को नुकसान होता हैं। कुछ डिजाइनों में टैटू उकेरने वाली सूईयों को शरीर में गहरा चुभाया जाता है, जिससे मांसपेशियों तक को नुकसान पहुंचता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि शरीर पर तिल वाले स्थान पर टैटू नहीं बनवाना चाहिए।

त्वचा पर स्थानिक दुष्प्रभाव

सार्कोईडोसिस टाइप, स्क्लेराडर्मा टाइप और बार-बार होने वाले संक्रमण, केलॉइड फॉर्मेशन या घाव का निशान रह जाने की भी आशंका होती है, मेहंदी से बनने वाले अस्थायी टैटू सुरक्षित होते है। वैसे एक रसायन पेराफेनिलीनेडायमाइन के कारण काली मेहंदी अलर्जी की वजह बन सकती है।

अन्य संभावित संक्रमण

किसी मेले में या साफ सफाई का ध्यान नहीं रखने वाले टैटू सेंटर पर टैटू कराना खतरे से खाली नहीं होता। यह हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, एचआइवी संक्रमण या इनफेक्टिव एंडोकार्टिडिस तक की वजह बन सकता है. कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को तो सेप्टिसेमिया तक का खतरा होता है। ग्लुकोज 6 फॉस्फेट डीहाइड्रोजेनीस की कमी वाले लोगों में लाल मेंहदी लाल रक्त कोशिकाओं के लिए खतरा बन सकती हैं।

टैटू से जुड़ी अन्य समस्याएं

टैटू करा चुके लोगों को एमआरआई के दौरान जलन का अहसास हो सकता है क्योंकि टैटूइंग के लिए मेटेलिक इंक इस्तेमाल होती है कुछ टैटू पिगमेंट्स में कैडमियम या कोबाल्ट हो सकता है जो कैंसरजन्य है, हालांकि टैटू और कैंसर का संबंध साबित नहीं हो सका हैं।

सावधानियां

यदि अपने शरीर की मांसपेशियों को टैटू बनाने से होने वाले नुकसान को बचाना चाहते हैं तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए।

आप टैटू बनवाने से पहले ये भी जरूर सुनिश्चित कर लें कि टैटू बनाने वाला इसका अच्छा जानकार हो और उसके पास आधुनिक उपकरण और साफ-सफाई का पूरा ध्यान दिया जाता हो। टैटू बनाने के पहले हेपेटाइटिस बी का टीका लगवा लें। इसके अलावा उस जगह पर नियमित रूप से एंटीबायोटिक क्रीम लगाते रहें. इन सब उपायों को करने और इनके बारे में जानने के बाद टैटू बनवाएंगे तो आपको ज्यादा नुकसान नहीं होगा बल्कि टैटू बनाने के बाद होने वाली परेशानियों से बच सकते हैं। इस कला में माहिर किसी तज्ञ से ही टैटू बनवाना चाहिए।

बच्चों और किशोरों में टैटू को लेकर डॉक्टर, शिक्षक और अभिभावक भरोसेमंद जानकारी के पहले स्रोत हो सकते हैं। टैटू के लिए उम्र की सीमा भी तय है, बेहतर यही होगा कि टैटू कराते समय आपके साथ कोई जिम्मेदार व्यक्ति हो। टैटूइंग पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं, यह स्थानीय एलर्जी, केलॉइड (Keloid) फॉर्मेशन या किसी संक्रमण की वजह बन सकता है।

मधुमेह के कारण अगर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो । स्टेरॉयड्स ले रहा हो या उसका कोई अंग ट्रांसप्लाट किया गया है तो उसे टैटू नहीं करना चाहिए । केलॉइड फॉर्मेशन (Keloid Formation) का उसका पिछला रिकॉर्ड भी जांचना जरूरी है, क्योंकि टैटू में केलॉइडस बन सकते है आइसोट्रेटिनोनिन से मुंहासों के लिए की जाने वाली ओरल थैरेपी भी घाव भरने में देरी की वजह बन सकती है। सोरायसिस, लिकेन प्लेनस, विटिलिगो और डिसकॉयड ल्यूपस जैसी त्वचा की बीमारियों वालों को तो टैटू से पूरी तरह से बचना चाहिए।

कैसे हटाएं टैटू

टैटू को हटाना इतना आसान नहीं होता। इसे हटाना कठिन व ज्यादा महंगा होता हैं। इसमें वक्त बहुत लगता है और यह बहुत बुरा अनुभव होता हैं। लेजर थैरेपी की मदद से टैटू को हटाया जाता है। इसमें कई सेशन होते हैं, लेकिन टैटू के पूरी तरह से हटने की कोई गारंटी नहीं होती। पहले क्रोयोसर्जरी, थर्मल कॉटरी या सर्जिकल रीसेक्शन को आजमाया जा चुका है। इन सभी में घाव का कोई न कोई निशान या पिगमेंट रह जाता है।

अतः युवाओं को मेरा कहना है कि फैशन की होड़ में न आएं तथा देखादेखी न करें। जो चीज शरीर के लिए नुकसानदायक है, उसे न करें। त्वचा पर होने वाली हानियों को जानने के बाद तो इन सब चीजों से दूर ही रहना चाहिए।

श्री नितिन मेश्राम
नागपुर

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