स्वस्थ और चमकदार त्वचा के लिए हाइड्रेशन यानी शरीर में पर्याप्त पानी की मात्रा बनाए रखना बेहद आवश्यक है। पानी न केवल हमारे शरीर को अंदर से साफ और संतुलित रखता है, बल्कि त्वचा को भी नमी और लचीलापन प्रदान करता है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो त्वचा रूखी, बेजान और थकी हुई दिखाई देने लगती है। उचित हाइड्रेशन से त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है और उसकी कोमलता बनी रहती है। यह त्वचा से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी मदद करता है, जिससे मुंहासे और अन्य समस्याओं की संभावना कम हो जाती है। इस विषय में हम जानेंगे कि हाइड्रेशन का त्वचा के स्वास्थ्य से क्या संबंध है और कैसे सही मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करके त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।
हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग हमारी त्वचा है। यह त्वचा ही है जो संक्रमण, प्रदूषण, धूप, चोट से बचाव करके हमें सुरक्षित रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक स्वस्थ त्वचा एक स्वस्थ शरीर का आईना होती है। जब हमारा शरीर भीतर से निरोगी रहेगा, उसमें सभी पोषक तत्व और जल की मात्रा बराबर होगी, तो त्वचा भी सुंदर और कांतियुक्त, मुलायम दिखेगी। हमारे शरीर का 60% हिस्सा पानी होता है। रक्त परिसंचरण के लिए पर्याप्त जल की मात्रा आवश्यक है, जिसके द्वारा हमारी सारी कोशिकाओं को पोषण मिलता है, उनमें निर्मित विष द्रव्यों को पसीना और मूत्र के द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है। इससे रक्त का PH सही बना रहता है, सारे अवयवों का कार्य सुचारू रूप से चलता है, हमारी त्वचा भी सही मात्रा में जलियांश से नम रहती है, झुर्रियां और ageing process को धीमा करती है, toxins को बाहर निकालती है, त्वचा की मरम्मत और पुनः निर्माण सुचारू रूप से शुरु रखती है, त्वचा का लचीलापन बनाए रखती है।
पानी की कमी के दुष्प्रभाव
हाइड्रेशन स्वस्थ त्वचा की आधारशिला है। अगर शरीर में किसी कारणवश पानी की कमी हो जाए तो उसके दुष्प्रभाव शरीर के अन्य संस्थानों के साथ साथ त्वचा पर भी दिखाई देने लगते हैं-
रूक्षता – त्वचा में रूखापन बढ़ जाता है, वह बेजान दिखने लगती है।
रंगत – त्वचा की रंगत फीकी दिखने लगती है।
एलर्जी – ड्राइनेस की वजह से allergens और infections उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है।
जलन – त्वचा में दाह होने लगती है।
मुंहासे – त्वचा की कोशिकाओं में संचरण कम हो जाता है, जलियांश की कमी से त्वचा जो एक बैरियर के रूप में बाह्य तत्वों से खुद को सुरक्षित रखती है, यह काम बाधित होने लगता है, फलतः sebum वहीं जमा होने लगता है और उसमें संक्रमण भी हो सकता है, इसलिए मुंहासे बढ़ने लगते हैं।
Elasticity कम होना – जलियांश की कमी से त्वचा का प्राकृतिक लचीलापन कम होकर उसमें झुर्रियां पड़ने लगती है। डीहाइड्रेशन होने पर डॉक्टर्स सर्वप्रथम त्वचा का ही परीक्षण करके पता लगाते हैं कि व्यक्ति को कितना डीहाइड्रेशन हुआ है?
Early Ageing – पर्याप्त हाइड्रेशन के अभाव में त्वचा में समय के पूर्व ही ढलती उम्र की निशानियां दिखने लगती है।
स्वस्थ त्वचा के लिए हाइड्रेशन कैसे बनाएं रखें?
पर्याप्त जल का सेवन – भरपूर पानी पीना चाहिए। इसका मतलब बहुत ज्यादा भी नहीं अपितु अपनी प्रकृति देखकर, अपना work place के अनुसार जल की मात्रा निर्धारित करना चाहिए। जैसे धूप और गर्म जगह पर काम करने वाले व्यक्तियों को ज्यादा पानी पीना चाहिए। गर्मी के मौसम में पानी की आवश्यकता बढ़ जाती है, केवल पानी के अलावा electrolytes से भरपूर फल, सब्जियां, शरबत आदि का सेवन बढ़ा देना चाहिए। जैसे नारियल पानी, छाछ, कैरी का पना, खट्टे फलों का रस, शिकंजी, शरबत, ठंडाई आदि द्रव आहार द्रव्यों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। आहार में गाय के घी का प्रयोग उचित मात्रा में जरूर करें। चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, शराब बंद कर देना चाहिए।
त्वचा की बाहरी देखभाल – हमारी त्वचा बाह्य वातावरण के निरंतर संपर्क में रहती है। धूप से बचाव करने के लिए हम जागरूक होते हैं, और sunscreen वगैरह का उपयोग करते है, लेकिन बहुत समय तक AC के अंदर रहने से भी त्वचा में दुष्प्रभाव पड़ता है, रूखी और ठंडी हवा से त्वचा dehydrate होती है, इसके हानिकारक परिणाम के बारे में हम नावाकिफ होते हैं। इसलिए हमें proper skin care के द्वारा इन दुष्प्रभावो से त्वचा की रक्षा करनी चाहिए।
साबुन का प्रयोग बंद कर देना चाहिए – साबुन या liquid soap या विभिन्न face wash का प्रयोग बंद कर देना चाहिए, इसके बजाय दूध, बेसन, हल्दी, चंदन, नागरमोथा, मंजिष्ठा, सारिवा, नींबू, गुलाब जल, एलोवेरा, यष्टिमधु, दही, मुल्तानी मिट्टी, जायफल, संतरे के छिलके का पाउडर आदि का प्रयोग अपनी त्वचा के अनुसार करना चाहिए।
त्वचा की सफाई के पश्चात ग्लिसरीन, एलोवेरा जेल, नारियल तेल, बादाम रोगन, शतधौत घृत, गुलाबजल आदि त्वचानुसार लगाना चाहिए। गर्म मौसम में गुलाबजल का mist बीच बीच प्रयोग में कर सकते हैं। अच्छी क्वालिटी के सनस्क्रीन का प्रयोग भी अपने भौगोलिक वातावरण की जरूरत है। घर से निकलने के आधे घंटे पहले सनस्क्रीन लगा लेना चाहिए और आवश्यकतानुसार 5 घंटे के पश्चात दोबारा लगाना चाहिए।
इस प्रकार पर्याप्त जल सेवन, संतुलित आहार और उचित रुप से त्वचा की देखभाल न केवल त्वचा को सुंदर, स्वस्थ बनाते हैं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाते हैं।

डॉ. संगीता जैन गुप्ता
M.D. आयुर्वेद, M.R.A.V. (पंचकर्म)
नागपुर