डायबिटीज की बीमारी को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां हैं, जिसकी वजह से वे काफी संकुचित जीवन जीने लगते हैं। जबकि डायबिटीज के मरीज भी एक स्वस्थ व्यक्ति की तरह ही सामान्य जीवन जी सकते हैं। जरूरत है तो केवल जागरूकता की। जानिए इस बीमारी से जुड़े कुछ मिथ और उनकी सच्चाई।
1. तीन-चार वर्ष के बच्चों को डायबिटीज नहीं होती हैं!
कई लोगों का मानना है कि बहुत छोटे बच्चों विशेषकर 2 से 4 साल की आयु वाले बच्चों को डायबिटीज होने की आशंका बिल्कुल नहीं होती है। जबकि इस उम्र में भी डायबिटीज हो सकती है। बच्चों में डायबिटीज को टाइप-वन डायबिटीज कहते हैं और ऐसा भी नहीं है कि ये आनुवांशिक होती है। दरअसल पेन्क्रियाज की पूंछ में बीटा सेल्स होते हैं जो वायरल इंफेक्शन या ऐसी ही किसी अन्य वजह से नष्ट हो जाते हैं। यही बीटा सेल शरीर में इन्सुलिन का निर्माण करते हैं और इनके नष्ट होने से ही इन्सुलिन की मात्रा कम होने लगती है। टाइप-वन डायबिटीज में इन्सुलिन की कमी 85 फीसदी तक हो जाती है।
2. मीठा नहीं खाते हैं, तो डायबिटीज नहीं हो सकती !
डायबिटीज का मीठा खाने से कोई संबंध नहीं है। कई लोग जो रोज मीठा खाते हैं उन्हें भी डायबिटीज नहीं होतीं, जबकि कई डायबिटीज मरीज ऐसे भी हैं जो मीठा बिल्कुल नहीं खाते। दरअसल, डायबिटीज होने का कारण इन्सुलिन की कमी या इन्सुलिन रेजिस्टेंस है, मीठा खाना नहीं। लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि डायबिटीज होने के बाद भी शुगर खाना उसी मात्रा में बरकरार रखी जाए। डायबिटीज के मरीज मिठाई डॉक्टर की सलाह से खा सकते हैं। इसके साथ ही मिठास के लिए शक्कर की जगह एस्पार्टेम या सूक्रोलेज का उपयोग करना इनके लिए फायदेमंद है।
3. यूरिन में ग्लूकोज आना बंद हो जाए तो शुगर की दवाई बंद की जा सकती है।
शुगर के कई मरीज यूरिन में ग्लूकोज के आधार पर दवाई की मात्रा कम या बंद कर देते हैं, जबकि ये बहुत गलत है। यदि ब्लड ग्लूकोज की मात्रा 100 मिलीग्राम से कम है तो ही थोड़ी दवाई कम की जा सकती है, लेकिन वो भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही। ब्लड ग्लूकोज दवाईयों के साथ नार्मल रहना चाहिए और वही डोज मेन्टेन किया जाना चाहिए। यूरिन में ग्लूकोज आना बंद हो भी जाए तो दवाई बंद या कम नहीं की जा सकती। हालांकि इस परिस्थिति में भी डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
4. हृदयाघात के अलावा अन्य बीमारियों की आशंका डायबिटीज मरीजों में कम होती है!
ये सही है कि डायबिटीज के मरीजों को हृदयाघात होने का खतरा सामान्य की तुलना में दस गुना से भी ज्यादा होता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि हृदयाघात के अलावा इन्हें कोई ओर बीमारी होने की आशंका नहीं होती। इसके अलावा माइक्रो एन्जियोपेथी की वजह से उन्हें छोटे-छोटे हार्ट अटैक आते रहते हैं। यह कार्डियक फेल्युअर अर्थात हार्ट के द्वारा ब्लड के पम्प करने की ताकत कम कर देते हैं या फिर ये माइक्रोवेसल्स को संकरा करके एन्जाइना जैसा दर्द उत्पन्न करते रहते हैं। इसी वजह से उन्हें कई बार कार्डियोमायोथेरेपी भी हो जाती है।
5. डायबिटीज के मरीजों को आलू, चावल और फल खाना मना होता है।
कई लोगों में ये गलत धारणा है कि डायबिटीज के मरीजों को मीठे फल, आलू और चावल खाना बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। जबकि ऐसा नहीं है। ये मरीज कोई भी फल 100 से 200 ग्राम प्रतिदिन खा सकते हैं, ध्यान केवल इस बात का रखना होता है कि फल बहुत ज्यादा मीठे ना हो। आलू और चावल भी कभी-कभी थोड़ी मात्रा में खाए जा सकते हैं। दरअसल, डायबिटीज के मरीज हर वो चीज खा सकते हैं जो सामान्य व्यक्ति खा सकता है। कभी-कभी मिठाई भी, लेकिन सीमित मात्रा में। चिकित्सक के मार्गदर्शन में दवाई समय पर लेना इनके लिए जरूरी है।