वर्तमान में तनाव और चिंता केवल व्यक्तिगत समस्याएं नहीं है बल्कि यह एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट की दास्तान बन चुकी है। बदलते जीवनशैली के तरीके असंतुलित खानपान डिजिटल निर्भरता और सामाजिक दबाव ने इन भावनाओं को और अधिक बढ़ावा दिया है। इस चुनौती का हल सिर्फ दवाओं के जरिए नहीं मिलेगा बल्कि इसके लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। योग और प्राणायाम …।

आज की अधिक रफ्तार और प्रतिस्पर्धी दुनिया में तनाव (Stress) और चिंता (Anxiety) आम समस्या बन गई हैं। बदलती जीवनशैली, असंतुलित आहार, नींद की कमी, अत्यधिक काम का दबाव, पारिवारिक और सामाजिक कठिनाइयाँ तथा डिजिटल दुनिया में निर्भरता के बढ़ते स्तर ने इन्हें जीवनशैली विकार (Lifestyle Disorder) का रूप दे दिया है। पहले जहाँ तनाव को एक अस्थायी अवस्था माना जाता था, वहीं अब यह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं की जड़ बन गया है। इसका असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, डायबिटीज, मोटापा और अवसाद जैसी शारीरिक-मानसिक बीमारियों को भी जन्म देने मे भी अहम भूमिका निभाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी मानसिक तनाव और चिंता को 21वीं सदी की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बताया है। ऐसे में आवश्यक है कि तनाव और चिंता को केवल बीमारी न मानकर, एक जीवनशैली विकार के रूप में समझा जाए और इसके समाधान के लिए योग, प्राणायाम, संतुलित आहार तथा सकारात्त्मक सोच जैसी प्राकृतिक पद्धतियों को अपनाया जाए।

समस्या की गंभीरता

तनाव और चिंता आज वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाले मानसिक स्वास्थ्य विकारों में शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO 2022 की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की लगभग 15 से अधिक आबादी किसी न किसी रूप में मानसिक तनाव या चिंता से प्रभावित है। भारत जैसे विकासशील देशों में स्थिति और भी गंभीर है जहाँ प्रत्येक चार में से एक व्यक्ति जीवन के किसी न किसी चरण में तनाव या चिंता से गुजरता है। महामारी COVID19 के बाद यह समस्या और गहराई से उभरकर सामने आई है। लगातार लॉकडाउन आर्थिक असुरक्षा और सामाजिक दूरी ने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया। शोध बताते हैं कि लगातार तनावग्रस्त रहने से न केवल अवसाद और अनिद्रा जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं बल्कि यह प्रतिरक्षा तंत्र Immune System को भी कमजोर करता है जिससे शरीर विभिन्न बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। इस प्रकार तनाव और चिंता को केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट Public Health Crisis के रूप में देखना आवश्यक है।

जीवनशैली विकारों का असर

मोटापा भारत में महिलाओं में मोटापे की दर बढ़कर 24 हो गई है आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24।
डायबिटीज और उच्च रक्तचाप युवाओं में पहले से अधिक केस दर्ज हो रहे हैं।
मानसिक थकान और अनिद्रा शहरी ही नहीं ग्रामीण भारत में भी तेजी से बढ़ रही है।
प्राणायाम और योग, अनुलोम विलोम, और भ्रामरी से मानसिक शांति ।
आज का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी यह मानता है कि योग तनाव कम करने का एक प्रभावी उपाय है। योग में दो प्रमुख तत्व शामिल होते हैं – आसन और प्राणायाम । विशेष रूप से प्राणायाम मानसिक तनाव को कम करने और मन को संतुलित करने में बहुत लाभकारी माना जाता है। यहां प्राणायाम तकनीकों पर चर्चा करेंगे जो तनाव, चिंता और मानसिक दबाव को घटाने में अद्भुत परिणाम दे सकती हैं।
1 अनुलोम विलोम प्राणायाम : इस प्राणायाम को नाड़ी शोधन भी कहा जाता है।
विधि – सीधे बैठे अपनी रीढ़ को सीधा रखें। दाहिने अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से पाँच गिनती तक गहरी सांस लें। इसके बाद बाई नासिका को बंद करके दाहिनी नासिका से सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को विपरीत दिशा में दोहराएं।
लाभ – यह प्राणायाम शरीर की ऊर्जा का संतुलन स्थापित करता है सर्दी और गर्मी के बीच सामंजस्य बनाए रखता है और तंत्रिका तंत्र Sympathetic Parasympathetic को शांत करने में मदद करता है।

2 उज्जायी प्राणायाम : इसे विजय श्वसन के नाम से भी जाना जाता है।
विधि- अपने सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को धीरे-धीरे करें। अपने ध्यान को अपनी सांसों पर लगाएं। सोचें कि आपकी सांस एक विद्युत प्रवाह के रूप में आपकी रीढ़ के सहारे बह रही है।
लाभ – यह प्राणायाम आपको मानसिक शांति प्रदान करता है तनाव और चिंता के स्तर को कम करता है और आपकी एकाग्रता को बढ़ाता है।

3 भ्रामरी प्राणायाम : यह एक बेहद साधारण और प्रभावी उपाय है जो तनाव और मानसिक असंतुलन को दूर करने में मदद करता है।
विधि- अपनी आँखें बंद करें और अंगूठों से अपने कानों को बंद कर लें जबकि बाकी उंगलियाँ अपनी आँखों और होंठों पर रखें। गहरी श्वास लें और उसे छोड़ते समय मधुमक्खी की गुनगुनाहट हम्म्म३ की ध्वनि निकालें।
लाभ – यह तकनीक मन को शांत करती है और आपको आराम का अनुभव कराती है।

जीवनशैली – एक समग्र जीवनदर्शन ‘जीवनशैली विकारों से निपटने के लिए केवल योग का अभ्यास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे एक समग्र जीवनदर्शन के रूप में अपनाना आवश्यक है। योग शरीर, मन और आत्मा का संतुलन साधता है, वहीं संतुलित आहार शरीर को आवश्यक पोषण देत्ता है, नींद मानसिक शांति प्रदान करती है, नियमित व्यायाम्, ऊर्जा और स्फूर्ति बनाए रखता है और डिजिटल डिटॉक्स मन को अनावश्यक तनाव से मुक्त करता है। इन सभी पहलुओं का सम्मिलित अभ्यास ही वह ‘होलिस्टिक एप्रोच है, जो न केवल तनाव और चिंता जैसे मानसिक रोगों को नियंत्रित करता है, बल्कि मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे शारीरिक विकारों से भी बचाव करता है। इस प्रकार योग और जीवनशैली सुधार मिलकर व्यक्ति को सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सुखी जीवन की ओर ले जाते हैं।”

1 संतुलित आहार का महत्व : पोषण से भरपूर भोजन न केवल शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालता है। ताजे फल सब्जियाँ साबुत अनाज दालें और मेवे साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। प्रोसेस्ड फूड और अधिक चीनी तथा तैलीय आहार से दूर रहना मोटापा मधुमेह और हृदय रोगों के विकास को रोकने में मदद करता है। सकारात्मक सोच और ध्यान मानसिक शक्ति और संतुलन बनाए रखने का सबसे सरल उपाय है।

2. शारीरिक गतिविधि : रोजाना 30 से 40 मिनट तक चलना, दौड़ना या साइकिल चलाना हमारे शरीर को सक्रिय और तंदुरुस्त बनाए रखता है। व्यायाम के दौरान हैप्पी हार्मोन यानी एंडोर्फिन का स्राव होता है जो अवसाद और तनाव को काफी कम करने में मदद करता है। इसके अलावा शारीरिक गतिविधि हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने के साथसाथ मोटापे को नियंत्रित करने में भी सहायक होती है।

3. डिजिटल डिटॉक्स और सामाजिक जुड़ाव : अत्यधिक मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग मानसिक थकान और तनाव को बढ़ा सकता है। समय समय पर डिजिटल डिटॉक्स करके जब हम प्रकृति के बीच या परिवार और मित्रों के साथ समय व्यतीत करते हैं तो यह हमारी मानसिक शांति और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। सामाजिक संबंध भी भावनात्मक समर्थन प्रदान करते हैं जो हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

वर्तमान में तनाव और चिंता केवल व्यक्तिगत समस्याएं नहीं हैं बल्कि यह एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट की दास्तान बन चुकी हैं। बदलती जीवनशैली के तरीके, असंतुलित खानपान, डिजिटल निर्भरता और सामाजिक दबाव ने इन भावनाओं को और अधिक बढ़ावा दिया है। इस चुनौती का हल सिर्फ दवाओं के जरिए नहीं मिलेगा बल्कि इसके लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। योग और प्राणायाम जैसे अनुलोमविलोम, उज्जायी, भ्रामरी और उद्‌गीत तकनीके मानसिक शांति और आत्मसंतुलन को बढ़ावा देती हैं। इसके साथ ही संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, सकारात्मक सोच और डिजिटल डिटॉक्स जैसी आदतें भी महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. अनिता हेमनानी
राजकुमार केवलरामानी कन्या महाविद्यालय,
नागपुर

चश्मा नहीं चाहिए ?

अहिल्यानगर के लेजर नेत्र शल्य चिकित्सक डॉ. प्रकाश कांकरिया और डॉ. श्रीमती सुधा कांकरिया ने 1985 में रूस जाकर डॉ. फेडोरोव से रेडियल केराटोटॉमी की तकनीक सीखी और अहिल्यानगर में साईं सूर्या नेत्र सेवा की स्थापना कर भारतीय नेत्र विज्ञान में इतिहास रच दिया।

डॉ. कांकरिया की साईं सूर्य नेत्र सेवा, वेवफ्रंट गाइडेड लेजर ट्रीटमेंट, आईसीएल, रिफ्रेक्टिव लेंस एक्सचेंज, केराटोकोनस ट्रीटमेंट, एपिलासिक जैसी कई सर्जरी एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने वाला भारत का पहला क्लिनिक बन गया। अब. अपने बच्चों डॉ. वर्धमान कांकरिया और डॉ. श्रुतिका कांकरिया के साथ मिलकर, उन्होंने पुणे में एशियन आई हॉस्पिटल की स्थापना की है और अब स्माईल, फ्लेम्टो लेसिक, जेप्टो लेजर मोतियाबिंद जैसी मल्टी-फोकल तकनीक को पहली बार भारत में लाने का कारनामा किया है। और अब, हाल ही में, साईं सूर्य नेत्र सेवा में कॉन्टूरा विजन की तकनीक आई है, जो न केवल चश्मे को खत्म करती है, बल्कि सभी को चश्मे से बेहतर दृष्टि देना भी संभव बनाती है।

डॉ. प्रकाश कांकरिया को इस क्षेत्र में 40 वर्षों का अनुभव है और वे 2 लाख से अधिक नेत्र शल्य चिकित्सा करने वाले नेत्र रोग विशेषज्ञों में से हैं। वे दुनिया के पहले ऐसे नेत्र रोग विशेषज्ञ थे जिन्होंने 8 घंटे की एक ही दिन में सौ से अधिक लेसिक लेजर सर्जरी की और आज तक उनके नाम 50 शतकों का रिकॉर्ड है और वे दुनिया के एकमात्र नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। वे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन अहिल्यानगर के पूर्व अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य नेत्र रोग सोसायटी के सबसे कम उम्र के पूर्व अध्यक्ष, साथ ही अखिल भारतीय अपवर्तक सर्जन सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष हैं और कई अंतरराष्ट्रीय नेत्र रोग सोसायटी के विशेष सदस्य हैं और मनकन्हैया आई सोसायटी भारत की पहली निजी नेत्र सोसायटी है और उन्होंने हजारों अत्यंत कठिन नेत्र प्रत्यारोपण सर्जरी की हैं। वे भारत के एकमात्र नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं जो अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद उनकी आंखें दान करके नेत्र प्रत्यारोपण सर्जरी कर सकते हैं। मोतियाबिंद नेत्र शिविर की तरह, चश्मे का नंबर बदलने की सर्जरी के लिए पूरे भारत में शिविर आयोजित करने से यह तकनीक भारत में बहुत लोकप्रिय हो गई है और इस नई तकनीक के कारण, हजारों युवाओं ने चश्मे के कारण खोए अपने जीवन के सपनों को पूरा किया है और फिर से अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं।
 
मोतियाबिंद के लिए जेष्टो लेजर तकनीक : यह तकनीक अधिक सटीकता प्रदान करती है। चूँकि यह सर्जरी दर्द रहित होती है, इसलिए बची हुई आँखों को सुन्न करने की जरूरत नहीं होती और सर्जरी के बाद पट्टी बांधने की भी जरूरत नहीं होती। मरीज जल्दी देख सकता है और चश्मे के साथ एक घंटे के भीतर घर जा सकता है। वह 2-3 दिनों में अपना दैनिक कार्य फिर से शुरू कर सकता है। इस प्रकार की सर्जरी प्राकृतिक दृष्टि प्रदान करती है और सर्जरी के जोखिम भी बहुत कम होते हैं। यह उपचार पद्धति कम उम्र में मोतियाबिंद और मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए वरदान है।
 
अब नए हथियार कॉन्दूरा से हमेशा के लिए चश्मा पहनें – चश्मे के नंबर और दृष्टि दोष को ठीक करने के लिए दो दर्जन से ज्यादा विभिन्न प्रकार की नेत्र शल्य चिकित्साएँ विकसित की गई हैं, और साईं सूर्या आई सर्विस और एशियन आई हॉस्पिटल दुनिया के उन गिने-चुने संस्थानों में से हैं जहाँ ये सब एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। कंप्यूटर तकनीक और सभी नेत्र उपचार विधियों में 40 वर्षों के अनुभव के कारण, अब -0.5 से -30.0 और 18 नंबर वाले चश्मे पहनना संभव हो गया है।

संपर्क – साई सूर्य नेत्रसेवा,

माणिक चौक, अहिल्यानगर 414001
फोन 02412341417
हेल्पलाईन 8888982222, 9112288611
Email: saisuryaa85@yahoo-com
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  ब्लड प्रेशर बढ़ने से आंखों में होते हैं बदलाव

हाई ब्लड प्रेशर को हाइपरटेंशन भी कहा जाता है। ये एक ऐसी स्थिति है. जिसमें आर्टरी पॉल के खिलाफ खून का दबाव ज्यादा होता है। हाई बीपी पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि इससे आपके अंगों पर दबाव पड़ता है और हार्ट अटैक स्ट्रोक और किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है साइपरटेंशन के बारे में सबसे खतरनाक बात यह है कि जब तक इसकी स्थिति बहुत गंभीर नहीं हो जाती, तब तक इसके शायद ही कोई लक्षण होते हैं। हाई बीपी की पहचान करने का सबसे अच्छा तरीका नियमित रूप से उसकी निगरानी करना है।
आखों के आगे लाल धब्बे हाई ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकते है। ये टूटी हुई रक्त वाहिनियों के कारण हो सकते है इसलिए अपनी आआंखों की जांच करवाना सबसे अच्छा रहता है. खासकर लात घने आपकी आंखों में कई समय तक रहती है। हाइपरटेंशन आंखों की रोशनी कम करने का कारण भी बन सकता है। यह हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी नामक बीमारी को जन्म दे सकता है जिसमें ब्लड ऐसेला की मॉल मोटी हो जाती है और ब्लड पलों को रोक देता है। इससे आखो की रेटिना में सूजन और ब्लड वेसेल्स लीक हो सकता है। यदि आपका वजन अधिक है तो आपको हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा हो सकता है। ज्यादा नमक खाना, फल नहीं खाने से भी बीपी हाई होता है। बीपी कम करने के उपाय : * अगर आपका वजन अधिक है तो कम करें। * रोजाना प्यायाम करें। * नमक का इस्तेमाल कम करें।*  शराब का सेवन बंद कर दें। * नेचुरल, लोकल व मौसमी फूड से युक्त हेल्दी डाइट लें। * कैफीन का सेवन कम करें। * धूम्रपान छोडने की कोशिश करें।

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