1. किडनी और उसके सामान्य रोगों की प्राथमिक जानकारी –
रचना और कार्य स्त्री हो या पुरुष, सभी के शरीर में दो किडनियाँ होती हैं, जो पेट के ऊपर और पीछे की तरफ रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित होती हैं। किडनी का काम है। खून को साफ करना, शरीर में तरल और नमक का संतुलन बनाए रखना तथा रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करना।

किडनी फेल्योर क्या है? – जब दोनों किडनी कमजोर होकर ठीक से काम करना बंद कर देती हैं, तब इसे किडनी फेल्योर कहते हैं। अगर दो में से एक किडनी खराब हो जाए तो इसका असर किडनी की कार्यक्षमता पर नहीं पड़ता। किडनी सही तरह से काम कर रही है या नहीं, यह जानने के लिए खून में क्रिएटिनिन की जाँच की जाती है।

क्रॉनिक किडनी डिजीज (सी. के.डी.) – यह बीमारी मुख्यतः डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं के कारण होती है। इसमें धीरे-धीरे (महीनों या वर्षों में) किडनी की कार्यक्षमता कम होती जाती है और उसे ठीक नहीं किया जा सकता। लंबे समय बाद दोनों किडनियाँ काम करना बंद कर देती हैं (एंड-स्टेज किडनी डिजीज)। शुरुआती अवस्था में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन अंतिम और गंभीर अवस्था में नियमित डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है।

एक्यूट किडनी इंजरी (अचानक किडनी फेल्योर) – इस रोग में डिहाइड्रेशन, इन्फेक्शन, दवाओं आदि के कारण किडनी की कार्यक्षमता अचानक कम हो जाती है, लेकिन सही समय पर उचित इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) – सूत्र मार्ग में संक्रमण होने पर पेशाब करते समय जलन या दर्द होता है, बार-बार पेशाब लगती है और कभी-कभी बुखार भी आ सकता है।

2. किडनी की बीमारी के मुख्य लक्षण – कमजोरी महसूस होना, थकान लगना, भूख न लगना, उल्टी या जी मिचलाना।
सुबह उठने पर आँखों के आसपास सूजन, चेहरे और पैरों में सूजन।
कम उम्र में ब्लड प्रेशर का बढ़ना और दवा लेने के बावजूद नियंत्रित न होना।
खून की कमी (फीका पड़ना), पेशाब कम आना या पेशाब में झाग बनना।
यदि किसी व्यक्ति को ऊपर बताए गए लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर जाँच करानी चाहिए।

3. किडनी रोगों के निदान के लिए जाँच
* किडनी की बीमारी का शुरुआती पता लगाने का आसान तरीका है।
* नियमित ब्लड प्रेशर की जाँच ।
* पेशाब की जांच – इसमें प्रोटीन की मौजूदगी गंभीर संकेत हो सकती है।
* खून की जांच – यदि क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ा हुआ हो तो यह सी. के. डी. के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

4. किडनी को स्वस्थ रखने के आसान सुझाव
* नियमित व्यायाम करें और सही वजन बनाए रखें।
* संतुलित आहार लें सब्जियाँ, फल और रेशेदार (फाइबर) भोजन की मात्रा बढ़ाएँ, और नमक, चीनी, तेल और फास्टफूड का सेवन कम करें (नमक 5-6 ग्राम प्रतिदिन)।
* डायबिटीज और ब्लड प्रेशर हमेशा नियंत्रण में रखें और नियमित रूप से उसकी जाँच कराएँ।
* स्वस्थ व्यक्ति को हर दिन 2-3 लीटर पानी पीना चाहिए।
* धूम्रपान, तंबाकू, शराब, गुटखा, मावा जैसी आदतें छोड़ें।
* बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयाँ, खासकर दर्दनिवारक दवाएँ, न लें। देसी दवाओं से किडनी को नुकसान हो सकता है।
* 40 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी व्यक्तियों को हर साल किडनी की जाँच करवानी चाहिए।
किडनी से जुड़े लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ।

डॉ. संजय पंड्या
किडनी विशेषज्ञ, राजकोट

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