हम अक्सर सोचते हैं कि दिमाग ही हमारे विचारों, भावनाओं और स्वास्थ्य का नियंत्रण करता है। लेकिन हाल की वैज्ञानिक खोजों से पता चला है कि हमारे शरीर का एक और हिस्सा आंत (गट) भी मानसिक स्वास्थ्य में बहुत अहम भूमिका निभाता है। आंत और दिमाग के बीच इस गहरे रिश्ते को गट-ब्रेन एक्सिस (Gut Brain Axis) कहा जाता है।

गट-ब्रेन एक्सिस क्या है ?

गट-ब्रेन एक्सिस दरअसल एक तरह का दोतरफा संवाद है, जिसमें हमारा दिमाग और पाचन तंत्र लगातार एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। यह संपर्क मुख्य रूप से तीन तरीकों से होता है।

  • नसों के माध्यम से, खासकर वेगस नर्व जो आंत और दिमाग के बीच संपर्क का मुख्य पुल है।
  • हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर जैसे सेरोटोनिन और डोपामिन, जो मूड और पाचन दोनों को प्रभावित करते है। हमारे शरीर का लगभग 90% सेरोटोनिन (खुशी से जुड़ा रसायन) दिमाग में नहीं, बल्कि आंत में बनता है।
  • इम्यून सिस्टम के संकेतों के जरिए जो सूजन और संक्रमण जैसी स्थितियों में सक्रिय होते है।  

गट माइक्रोबायोम की भूमिका

हमारी आंत में अरबों सूक्ष्मजीव रहते हैं – बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि जिन्हें मिलाकर गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये सूक्ष्मजीव केवल भोजन पचाने में ही मदद नहीं करते, बल्कि • विटामिन बनाते हैं (जैसे B12 और K) • इम्यून सिस्टम को प्रशिक्षित करते हैं • मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करते है।

  • और सबसे दिलचस्प बात-दिमाग पर असर डालते हैं। जब गट के “अच्छे” और “बुरे” बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है। (जिसे डिस्बायोसिस कहते हैं) तो न सिर्फ पाचन में दिक्कत आती है, बल्कि मानसिक समस्याएँ भी हो सकती हैं, जैसे तनाव, चिडचिड़ापन, डिप्रेशन या एकाग्रता की कमी ।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

अब तक के शोधों से बात सामने आई है कि डिप्रेशन, एंग्जायटी, बायपोलर डिसऑर्डर, यहाँ तक कि ऑटिज्म जैसी मानसिक बीमारियों में गट माइक्रोबायोम में बदलाव पाया गया है। गट में होने वाली सूजन दिमाग तक पहुँच सकती है और न्यूरोकेमिकल्स को प्रभावित कर सकती है।

आजकल वैज्ञानिक प्रोबायोटिक्स (फायबर जो इन बैक्टीरिया को खाना देते हैं) के जरिए मानसिक स्वास्थ्य सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। इस क्षेत्र को साइकोबायोटिक्स कहा जाता है।

गट और दिमाग को हेल्दी रखने के आसान उपाय

खान-पान में परिवर्तन – फायबर युक्त भोजन खाएं। जैसे फल, सब्जियों, साबुत अनाज, दालें। फर्मेटेड फूड शामिल करें। दही, छाछ, इडली, डोसा, अचार आदि। जंक फूड और बेवजह एंटीबायोटिक से बचें। ये आपके अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

शारीरिक गतिविधि करें – रोजाना थोडा टहलना, व्यायाम, योग करना फायदेमंद होता है।

तनाव को कम करें – मेडिटेशन, गहरी साँस लेना और योग तनाव घटाकर गट ब्रेन एक्सिस को संतुलित करता है।

अच्छी नींद लें – नींद की कमी से आंत और दिमाग, दोनों पर असर पड़ता है।

पेट और दिमाग के बीच गहरा रिश्ता है। जब आंत स्वस्थ होती है, तो दिमाग भी बेहतर काम करता है।

एक मनोरोग विशेषज्ञ के रुप में अब हम मानसिक स्वास्थ्य का मूल्यांकन करते समय आंत की स्थिति पर भी ध्यान देने लगे हैं। दवाओं और थेरेपी के साथ-साथ आंत की देखभाल मानसिक संतुलन बनाए रखने का एक नया रास्ता बन चुकी है।

तो अगली बार जब आपका पेट गडबड होने या किसी पर गट फीलिंग हो तो उसे नजरअंदाज मत कीजिए आपका पेट, आपका मन कुछ कह रहे हैं।

डॉ. हरकिशन ममतानी
एम. डी. मनोरोग (निमहांस, बैंगलोर) एम.आर.सी. साइक (यू . के.)
मनोरोग विशेषज्ञ, मनोवेद, नागपुर

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