चाय का नाम लेते ही हर किसी की जुबान पर अपनी मनपसंद चाय का स्वाद आ जाता है और वह चाय की चुस्कियां लेने के लिए उतावला हो जाता है। चाय के शौकीन दुनियाभर में मौजूद है लेकिन हर किसी को एक जैसी चाय पसंद नहीं है हर देश में अलग-अलग तरह की चाय पसंद की जाती है। हर व्यक्ति अपने पसंदीदा स्वाद की चाय पीकर पूरा दिन तरोताजा रहना चाहता है। किसी को हर्बल चाय पसंद है तो किसी को मसाला चाय भाती है। चाय की दुनिया में झांक कर देखें तो हजारों तरह के स्वाद मौजूद हैं जो न सिर्फ ताजगी देते हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं ।

बदलते समय के साथ चाय मात्र चुस्की ही नहीं रह गई, बल्कि यह एक हेल्थ ड्रिंक बन चुकी है। स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ने के कारण पहले की तुलना में आज दूध वाली चाय के मुकाबले ब्लैक टी, हर्बल टी, लेमन टी, इलायची, स्ट्रेस रीलिविंग रिजूविनेटिंग, स्लिमिंग टी व आइस टी जैसे फ्लेवर्ड टी का खूब अधिक चलन बढ़ गया है। मार्केट में चाय के ऐसे कई फ्लेवर्ड पैकेट उपलब्ध हैं जिन्हें गर्म पानी में डालो डिप करो और कुछ ही सेकड में चाय तैयार। इन चाय के शौकीन बढने के चलते घर ही नहीं छोटे-बडे रेस्टॉरेंट में भी इनका फुल रेंज देखी जा सकती है।

स्वास्थ्य की दृष्टि से इन फ्लेवर्ड चाय को लेकर युवाओं में काफी अधिक रूचि बढी है। चाय के विभिन्न लोकप्रिय और हेल्दी स्वादों की जानकारी प्राप्त करें।

ग्रीन-टी

ग्रीन-टी बेहद मशहूर चाय है जो कैमेलिया साइनेन्सिस नामक पौधे की पत्तियों से बनाई जाती है। इसके बनाने की प्रकिया में आक्सीकरण न्यूनतम होता है। मुख्यतौर पर यह एशिया और चाइना में पसंद की जाती है।

ग्रीन टी जो कि आमतौर पर घर, रेस्टारेंट और होटेल में इस्तेमाल की जाती है। इसमें पत्तों को तोड़कर कर्ल किसा जाता है फिर सुखाकर दानों का रूप दिया जाता है। ग्रीन टी को प्रोसेडस्ड नहीं किया जाता यह चाय के पौधे के ऊपर के कुब्ने पत्ते से बनती है। सीधे पत्तों को तोड़कर भी चाय बना सकते है। इसमें एंटी-ऑक्सिडेंट सबसे ज्यादा होते हैं। इसमें कैलरी भी नहीं होती। इसी ग्रीन टी से हर्बल व ऑर्गेनिक आदि चाय तैयार की जाती है। वहीं ग्रीन टी में कुछ जड़ी-बूटियां तुलसी, अश्वगंधा, इलायची आदि मिलाते हैं तो हर्बल टी तैयार होती है इसमें कोई एक या तीन-चार हर्ब मिलाकर भी डाल सकते है।

हरी चाय में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट शरीर के आक्सीडेंट संतुलन को बनाए रखने में कारगर होते हैं। एक शोध में दो चिकित्सीय परीक्षणों को आधार बनाकर हरी चाय के प्रभावी गुणों की जानकारी दी गई। पहले परिक्षण में 70 स्वस्थ धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को हरी चाय के अवयवों से तैयार सिगरेट का सेवन करने के लिए कहा। लगभग दो महिनों तक हरी चाय के अवयवों का सेवन करने के बाद इन व्यक्तियों को सिगरेट पीने की लत में 43.5 फीसदी कमी पाई गई और 31.7 फीसदी लोगों ने सिगरेट पीना छोड़ दिया।

दूसरे परीक्षण में उन 55 लोगों को चुना गया जो लंबे वक्त से सिगरेट पी रहे थे और उन्हें धूम्रपान करने की अधिक तलब महसूस होती थी। परीक्षण के पहले महीने के अंदर इनकी सिगरेट पीने की लत में 48 फीसदी और दूसरे महीने में 83 फीसदी और तीसरे महीने में 91 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

ग्रीन-टी के लाभ :- 

  • यह एन्टीबैक्टेरियल व एन्टीफंगल गुण की चाय होती है। ग्रीन-टी में पाया जाने वाला विटामिन सी फ्लू और सर्दी के उपचार में मददगार साबित होता है।
  • ग्रीन-टी एंटी एजिंग के साथ-साथ एंटी ऑक्सीडेंट का काम भी करती है। इससे त्वचा पर होनेवाले बढती उम्र के लक्षण जैसे झुर्रियां, झाइयां व सन बर्न से रक्षा होती है। हेल्दी स्किन का लाभ मिलता है।
  • ग्रीन-टी में उच्च फ्लोराइड नामक केमिकल पाया जाता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है। इसमें कैटेचिन पाया जाता है जो एल.डी.एल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है व भोजन को विषाक्त होने से बचाता है और फूड पॉयजनिंग के खतरे को कम करता है।
  • अति व्यस्तता के कारण व्यायाम ना करने वाले लोगों के लिए भी ग्रीन-टी का नियमित सेवन लाभकारी होता है।
  • ग्रीन-टी में उच्च फ्लोराइड नामक केमिकल पाया जाता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है। इसमें कैटेचिन पाया जाता है जो एल.डी.एल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है व भोजन को विषाक्त होने से बचाता है और फूड पॉयजनिंग के खतरे को कम करता है।
  • ग्रीन-टी में पाया जाने वाला Theophyline माँसपेशियों में आराम पहुँचाता है, जो ब्रोन्कियल ट्यूबों को सहयोग कर और अस्थमा की गंभीरता को कम करता है।
  • ग्रीन-टी भोजन के बाद पीने पर रक्त में शर्करा की वृद्धि को कम कर ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखता है। साथ ही यह मैटाबोलिज्म के रेट को भी कम करता है।
  • यह चाय कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करने में सहायक होती है।
  • ग्रीन-टी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट शरीर के फ्री रेडीकल्स को नष्ट कर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। इससे शरीर में बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है।
  • ग्रीन-टी खून को पतला बनाए रखती है जिससे खून का थक्का नहीं बन पाता।
  • ग्रीन-टी पीने से हार्टअटैक की आशंका भी कम हो जाती है।
  • ग्रीन-टी पीने वालों में पार्किंसंस (parkinsons) की संभावना कम होती है।
  • एलर्जी को दूर करने में ग्रीन टी का सेवन लाभकारी है।
  • ग्रीन-टी में एमिनो एसिड पाया जाता है जो की तनाव कम करता है।
  • ग्रीन-टी मुँह में बदबू पैदा करने वाले जीवाणुओं के विकास को धीमा करती है जिससे दंत रोगों को फैलाने वाले बैक्टेरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं।
  • गरम पानी में भीगे हुए टी बैग को दाँत पर रखने से दाँत के दर्द में काफी आराम मिलता है।
  • शरीर के किसी भी भाग में सूजन हो जाए तो उस पर गरम पानी में भिगोकर टी बैग रखें। इससे दर्द कम होगा और ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छा होगा।
  • ग्रीन-टी में polyphenols के रूप में एक एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो Free Radicals के खिलाफ लड़ता है अर्थात यह एजिंग के खिलाफ लडता है और दीर्घायु को बढ़ावा देता है। इससे स्ट्रेस कम होकर एनर्जी मिलती है व मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है। इससे पाजिटिव मुड बनता है।
  • ग्रीन-टी शरीर को डिटॉक्स अर्थात शरीर शुद्धि का कार्य करती है। ग्रीन टी में स्थित कैटेचिन्स फैट मेटोबालिज्म को सुधारकर लिवर पर होनेवाले टॉक्सिक प्रभाव को कम करता है। इससे संपूर्ण शरीर शुद्ध होता है।
 

ग्रीन-टी बनाते समय सावधानियां

  • ग्रीन-टी को भाप पर बनाना चाहिए।
  • इसमें दूध नहीं मिलाया जाना चाहिए क्योंकि इससे एंटी ऑक्सीडेंट तत्व समाप्त हो जाते हैं।
  • अगर ग्रीन-टी को सही तापमान के पानी के साथ न पिया जाए तो यह पेट की समस्या का कारण बन जाती है।
  • ग्रीन-टी बनाते समय ध्यान रखें कि इसका पानी बिल्कुल उबला हुआ नहीं हो। उबला होने पर जब आप इसमें चाय डालते हैं तो एसिडिटी हो सकती है।
  • ग्रीन टी आयरन को अवशोषित करती है जिससे आयरन की कमी हो सकती है इसलिए जो लोग एनीमिया के शिकार है उन्हें ग्रीन टी पीते समय सावधानी बरतनी चाहिए। इस प्रभाव से बचने के लिए आप चाहें तो खाने के बीच में ग्रीन टी ले सकते हैं।
  • एक दिन में चार से पाँच तक ही ग्रीन टी पीनी चाहिए। इससे अधिक मात्रा में ग्रीन टी पीने से नींद ना आना, चिड़चिड़ापन आदि समस्याएँ हो सकती हैं।

ब्लैक टी
कोई भी चाय दूध व चीनी मिलाए बिना पी जाए तो उसे ब्लैक टी कहते हैं। यह चाय साधारण चाय मानी जाती है। वास्तव में यह चाय दुनियाभर में अन्य चायों की तुलना में ज्यादा पसंद की जाती है। यह साउथ एशिया की मुख्य चाय मानी जाती है, जो आसाम और दार्जिलिंग में पाई जाती है। ब्लैक टी गहरे लाल रंग की होती है जो कई स्वादों व खुशबूओं में मिलती है। दक्षिण में ब्लैक आइस्ड टी पसंद की जाती है। इसलिए इसमें ज्यादा मात्रा में कैफीन होती है। यह टी बैग्स में भी उपलब्ध है।

ब्लैक टी के लाभ :- 

  • यदि आप रोजाना ब्लैक टी पीते हैं तो हार्टअटैक का खतरा कम हो जाता है।
  • इसमें मौजूद फ्लेवेनाइड खराब कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है। ब्लैक टी पीने से धमनी की दीवार का सख्त होना और ब्लॉकेज होना कम हो सकता है।
  • यह चाय पाचन क्रिया में मददगार है।
  • ब्लैक टी पीने से वजन कम होता है क्योंकि यह बिना दूध और शक्कर से बनाई जाती है।
  • बालों में मेंहदी लगाने से पहले अगर उस पानी को ब्लैक टी डालकर उबाला जाए तो बाल काले और घने हो जाते हैं।

जिंजर हनी-टी
इसे अदरक की चाय के नाम से भी जाना जाता है। इसका स्वाद मीठा होता है। भारत में लोग इसे बड़े चाव से पीना पसंद करते हैं। यह चाय आलस्य दूर करके ताजगी लाती है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट के तत्व शामिल होते हैं जो शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं। शहद और अदरक साँस से संबंधित परेशानियों को भी दूर करने में सहायक है। शहद और अदरक का मिश्रण सर्दी, जुकाम और गले की खराश को दूर करता है। इससे पाचन क्रिया भी ठीक रहती है।

ब्लैक ब्रोसर-टी
यह फ्रूट्स, जडी-बूटियों, मसालों और खुशबूओं का मिश्रण है, जो आपको एकदम प्योर फ्लेवर का एहसास दिलाती है। साथ ही एंटी ऑक्सीडेंट की भी प्रचुर मात्रा पाई जाती है जो रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है।

लेमन टी
यह एक स्वादिष्ट पलेवर और प्राकृतिक खुशबू वाली चाय है, जो लेमन की भीनी-भीनी महक से भरी होती है। यह चाय तनाव दूर करती है। नींबू से विटामिन सी की कमी पूरी होती है और दिनभर एनर्जी व ताजगी का अनुभव होता है। ये शरीर में क्लीजिंग इफेक्ट का काम करती है और ब्लड से टॉक्सिन दूर करती है। इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट त्वचा के कैंसर के खतरों को भी कम करने में सहायक है।

तुलसी चाय

तुलसी के स्वाद वाली इस चाय को ठंडी और गरम दोनों तरह से पीना पंसद किया जाता है। इसे तुलसी के पौधे की पत्तियों व कलियों से तैयार किया जाता है। इस चाय को पुराने समय से भारत में खूब इस्तेमाल किया जाता आ रहा है। इसमें प्रचुर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है। तुलसी के पत्तों में सैकड़ों तरह के यौगिक पदार्थ पाए जाते हैं जिन्हें पायथे-केमिकल्स कहा जाता है, जो एकसाथ मिलकर स्ट्रांग एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, एंटी-वायरल बनाते हैं और शरीर इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं ये तत्व शरीर को प्राकृतिक रूप से रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं।

मसाला-चाय
मसाला चाय में लौंग, दालचीनी, छोटी इलायची, कालीमिर्च आदि मिलायी जाती है। इसका फ्लेवर कई खुशबूओं में होता है। एक सिप के साथ ही एकसाथ कई फ्लेवर साँसों में घुल जाता हैं। मसाला चाय में पर्याप्त मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं जो सर्दी-जुकाम और बुखार से बचाते हैं। यह चाय थकान और आलस्य दूर करके शरीर को स्फूर्ति प्रदान करती है। साथ ही पाचन क्रिया को भी नियमित रखती है और वजन को भी नियंत्रित रखती है।

इलायची-टी
चाय के साथ इलायची का मिश्रण एक फुर्तीला एहसास दिलाता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट का प्राकृतिक स्रोत भी है। यह एसिडिटी दूर करती है, सीने में जलन नहीं होने देती, ताजगी और स्फूर्ति देती है।

ऑरेंज स्पाइसर-टी
यह ऑरेंज का एक मजेदार फ्लेवर है। इसमें लौंग, दालचीनी, अदरक का भी मिश्रण होता है जो आपको एक अनोखे स्वाद का अनुभव कराती है। इससे खाँसी-जुकाम व सर्दी-बुखार में पीने से राहत का अनुभव होता है।

विविध तरह के फ्लेवर्ड आने के चलते काफी की तरह ही चाय भी आज लोगों के लिए फैशन सिम्बल बन गई है गर्म पानी में डिप करते ही कुछ ही सेकंड में चाय तैयार हो जाती है पीने में भी टेस्ट और दिखाने में भी यहां काफी शानदार दिखती है। इन फ्लेवर्ड चाय आने से पहले तक युवाओं की पंसद विविध तरह के कोल्ड ड्रिंक्स हुआ करते थे लेकिन आज इनकी पसंद ही बदल गई है।

 

प्रो. सतीश टेवानी
नागपुर

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