हमारा रसोई घर औषधालय है । यहां उपस्थित भिन्न-भिन्न प्रकार के मसाले भोजन को तो स्वादिष्ट बनाते हैं, साथ ही भोजन को पचाने में भी उपयोगी होकर शरीर को स्वस्थ रखने का कार्य करते है। रसोईघर में उपलब्ध अजवायन, अदरक व सौंफ के गुणधर्म की जानकारी यहां दी जा रही है।

अजवायन – सामान्यतः सभी घरों में अजवायन का प्रयोग मसाले के रूप में किया जाता है। चिकित्सक इससे दवाइयाँ भी बनाते हैं, इस नन्हीं अजवायन का प्रयोग करके आप भी इसके बेजोड़ गुणों को आजमा सकते है-

अजवायन के गुण – अग्नि के समान शक्ति प्रदायक है। अजवायन के सेवन से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है। अतः ठंड के दिनों में थोड़ी सी अजवायन और तुलसी की चार पत्तियाँ एक कप पानी में उबालकर पी जाए तो ठंड से उत्पन्न समस्याएँ दूर हो सकती है। इसका उपयोग शीत प्रकृति वाले व्यक्ति भी कर सकते है। इस प्रकार यह शरीर को चुस्ती-फुर्ती प्रदान कर शरीर के अवयवों को शक्ति प्रदान करता है।

वृद्धावस्था में इसका रस लाभप्रद है। अजवायन के तेल की मालिश, कानों में तेल डालना, खाद्य वस्तुओं के साथ अजवायन का सेवन वृद्धावस्था में होने वाली समस्याओं तथा त्वचा पर झुरियां, आँखों की ज्योति क्षीण होना, कानों में आवाज आना आदि दोषों को दूर करने में सहायक होता है। अजवायन तथा तुलसी की चाय मनुष्य को स्वास्थ्य प्रदान करती है। अजवायन से भूख खुलकर लगती है। थोड़ी सी अजवायन (एक या दो चम्मच) एक छोटी आधा चम्मच सेंधा नमक, एक चम्मच सोंठ लेकर एक साथ बारीक पीस लें। एक चम्मच चूर्ण खाना खाने से पहले नियमित रूप से सेवन करने से पाचक रस अच्छी प्रकार स्त्रावित होने लगता है। जिससे भूख अच्छी लगती है तथा पेट भी साफ रहता है।

खुश्क वस्तुओं का सेवन तथा आंतों में मल जमा होने के कारण खुश्की उत्पन्न होती है। जिससे व्यक्ति को बैचेनी, घबराहट आदि होने लगती है। अजवायन को भूनकर उसमें काला नमक तथा नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से उक्त समस्या दूर की जा सकती है। अजवायन का पानी भी काफी लाभदायक होता है।

विविध रोगों में अजवायन का उपयोग – अजवायन का उचित मात्रा में विभिन्न पदार्थों के साथ उपयोग अनेक रोगों में काफी लाभदायक होता है।

रक्त विकार – दस ग्राम कालीमिर्च, दो चम्मच अजवायन, एक ग्राम हींग, दो ग्राम बड़ी हरड़ और दो ग्राम काला नमक इनका चूर्ण बना लें। प्रातः सायं एक-एक चम्मच गरम गुनगुने पानी के साथ लेने से रक्त विकार नष्ट होने में सहायता होती है

कब्जियत – एक लीटर पानी में दो-तीन चम्मच अजवायन, एक चम्मच सोंठ और थोडा सा काला नमक एक या आधा चम्मच डालकर उबाल लें, जब यह पानी आधा रह जाए तो इसे रात को सोते समय पी लें। शौच साफ होकर कब्जियत धीरे-धीरे नष्ट हो जाएगी।

खांसी – तुलसी की दो पत्तियाँ, आधा चम्मच अजवायन, आधा चम्मच सोंठ इन तीनों को आधा लीटर पानी में उबाल लें, कुछ दिनों तक इस पानी का दिन में तीन बार थोड़ा-थोड़ा सेवन करें।

जीभ व तालू के छाले – इसके लिए अजवायन, तुलसी के बीज व लाल इलायची थोडी-थोडी मात्रा में लेकर पीस लें इस चूर्ण को मुँह में लेकर इधर-उधर फैलाएं फिर उत्पन्न लार को बाहर गिरा दें। कुछ ही दिनों में इससे लाभ होगा।

उदर कृमि – अजवायन का तेल तीन से सात बून्द तक लेने से उदर की कृमि नष्ट होने में सहायता मिलती है। पच्चीस ग्राम पीसी हुई अजवायन, आधा किलो पानी में डालकर रात को रख दें। प्रातः इसे उबाल लें। जब चौथाई पानी रह जाए तब उतारकर छान लें, ठंडा होने पर पिलावें।

जोड़ों का दर्द – अजवायन के तेल की सुबह-शाम दर्द पर मालिश करें। धीरे-धीरे इसका लाभ होने लगेगा।

वायु गोला – एक चम्मच अजवायन, काला नमक चौथाई चम्मच दोनों को पीस कर छाछ में मिलाकर पीने से वायु गोला में लाभ होता है।

दांत दर्द – आग पर अजवायन डालकर दुखते दाँतों पर धूनी दें। नमक व एक चम्मच पीसी हुई अजवायन गरम पानी में डालकर रख दें। थोडी देर जब पानी गुनगुना हो जाए तो पानी का मुँह में लेकर रोके, फिर कुल्ला कर दें इसी प्रकार बार-बार करें।

अमृतधारा – अजवायन से प्रसिद्ध अमृतधारा का भी निर्माण होता है जो कि अजीर्ण, अफारा, उल्टी, पेटदर्द, सर्दी-जुकाम, सिरदर्द आदि में लाभदायक है। 
विधि – अजवायन का सत, पीपरमेन्ट का सत, शुद्ध कपूर इन तीनों को समान मात्रा में भरकर मजबूत कार्क लगाकर रख दें। थोड़ी देर में यह जल जैसा तरल हो जाएगा। यही अमृतधारा है।

अदरक – अदरक को विश्वौषधि माना गया है। अदरक वातघ्न, पाचक, सारक, चक्षुष्य, कण्ठय और पौष्टिक है। अदरक आँतों के लिए उत्तम औषधि है। यह कृमि (पेट के कीडे) का नाश करता हैं। उन्हें मलद्वार से बाहर निकाल देता है। अदरक के रस का प्रतिप्रभाव नहीं होता है। भूख बढ़ाने के लिए अदरक के रस की तीन-चार चम्मच में सेंधा नमक व नींबू के रस की कुछ बूंदे मिलाकर भोजन के समय से आधा घण्टा पहले लेने से भूख खुलती है। इसके रस से पेट में पाचक रसों का योग्य प्रमाण में स्राव होता है। इससे पाचन भली प्रकार होता है तथा गैस भी उत्पन्न नहीं होती है। अदरक के प्रयोग से जुकाम सर्दी नष्ट होती है तथा सभी प्रकार के उदर रोगों में लाभकारी है। अदरक का रस सूजन, मूत्रविकार, पीलिया, अर्श, दमा, खाँसी, जलोदर आदि रोगों में भी लाभदायक होता है। अदरक हृदय विकारों को भी दूर करता है। आयुर्वेदाचार्यों का मत है कि अदरक के नियमित सेवन से जीभ एवं गले का कैंसर नहीं होता। अदरक के रस को कान में दो-तीन बूंद डालने से कान के दर्द में फायदा होता है। अदरक के छोटे दुकड़ों को एक कप पानी में उबालकर एक चम्मच शक्कर डालकर पीने से जुकाम में आराम मिलता है।

सौंफ – सौंफ से प्रायः प्रत्येक व्यक्ति परिचित है क्योंकि यह सभी के घरों में आसानी से मिल जाती है। अनेक प्रकार के अचारों, सब्जियों, कचौरी-समोसा, पराठें आदि में भी इसका प्रयोग किया जाता है। यह सबको स्वादिष्ट बनाती है। ठण्डाई में भी सौंफ का प्रयोग किया जाता है इससे ठण्डाई स्वादिष्ट एवं सुगन्धित होती है। सौंफ में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं, इसके सेवन से हर उम्र के लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

विभिन्न रोगों में सौंफ का प्रयोग अकेले या अन्य औषधियों के साथ निर्भयता पूर्वक किया जा सकता है। घरेलू औषधि के रूप में यह बहुत ही महत्वपूर्ण वस्तु है। इसकी लोकप्रियता इसके व्यापक गुणों की परिचायक है।

कुछ सामान्य रोगों में इसका प्रयोग निम्न प्रकार से किया जा सकता है – 

  • कब्ज की लिए सौंफ हानिरहित औषधि है। रात को सोते समय कुनकुने पानी से एक चम्मच सौंफ का नियमित सेवन करने से इस रोग से छुटकारा मिल जाता है।
  • दस्त के साथ आंव आने पर पाँच बूंद सौंफ के तेल को चीनी के साथ प्रतिदिन तीन-चार बार लेना चाहिए।
  • बवासीर जिसे अर्श भी कहते हैं, एक बेहद कष्टदायक रोग हैं। इसमें गुदा मार्ग पर मस्से फूल जाते हैं। यह बादी व खूनी दो तरह का होता है। इसके उपचार के लिए सौंफ, जीरा व धनिया एक-एक चम्मच लेकर एक गिलास पानी में उबाले, आधा पानी शेष रहने पर उसमें एक चम्मच देशी घी मिलाकर सेवन करें, अवश्य लाभ होगा।
  • बुखार आने पर सौंफ पानी में उबालकर पिलाएं। बुखार के साथ खांसी आने पर सौंफ के साथ अजवायन बराबर मात्रा में मिलाकर उबालें। इसे हर घंटे दो-दो चम्मच शहद मिलाकर पिलाएं। जुकाम होने पर उबालते समय पाँच-छः लौंग भी डाल दें।
  • भोजन करने के बाद सौंफ चबाने से छाले नहीं होते है तथा भोजन अच्छी तरह पचता है। सौंफ अनिद्रा दूर करती है साथ ही साथ स्मरण शक्ति भी बढ़ाती है। इसके लिए सौंफ का सेवन मिश्री के साथ करें व बाद में शुद्ध घी डालकर गाय के दूध का सेवन करें।
  • पेशाब रूक जाने पर भीगी हुई सौंफ पीसकर पानी व मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए। इससे पेशाब खुलकर आने लगता है।
  • सौंफ, जीरा व काला नमक मिलाकर चूर्ण बना लीजिए। खाने के बाद हल्के गुनगुने पानी के साथ इस चूर्ण को लीजिए, यह उत्तम पाचक चूर्ण है।
  • हाथ-पाँव में जलन होने की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनियां कूट छानकर मिश्री मिलाकर खाना खाने के पश्चात पाँच से छः ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।
  • आँखों की रोशनी सौंफ का सेवन करके बढ़ायी जा सकती है। सौंफ और मिश्री समान भाग लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच मात्रा सुबह-शाम पान के साथ दो माह तक लीजिए इससे आँखों की रोशनी बढ़ती है।

कृष्णचन्द्र टवाणी
प्रधान संपादक 'अध्यात्म अमृत'ज्ञानमंदिर,
सिटी रोड़, मदनगंज-किशनगढ़ (राज.)

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