आपका रसोईघर ही तो है आपका प्राथमिक चिकित्सालय ! इसे आप ‘डॉक्टर किचन’ भी कह सकते हैं । रसोईघर में पाए जाने वाले मसालों से लेकर अन्य सामग्री में चमत्कारी प्रभाव होते हैं, जिन्हें हम या तो नजरअंदाज कर लेते हैं अथवा जानते ही नहीं। हमें इन घरेलू ‘मेडिसिन्स’ की जानकारी होना आवश्यक है। साथ ही रसोईघर के रखरखाव पर खास ध्यान दें क्योंकि इसकी स्वच्छता आपके आरोग्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

किचन में जीरा, हल्दी, काली मिर्च, मेथी, लहसुन, प्याज, लौंग, इलायची, अदरक, राई, अजवायन, धनिया, कलमी, तेजपत्ता, किशमिश, बादाम, गुड़, शेंगदाना, दूध, दही, घी, शहद, हरी साग-सब्जी सभी चीजें मिल जाएंगी। शरीर को शक्कर व नमक दोनों चाहिए। सर्दी, खांसी, जुकाम, सिरदर्द, पेटदर्द, अम्लपित्त, पेशाब में जलन, पेट में कोडे, दांतदर्द, हलका-फुलका बुखार आदि से हम सभी आए दिन पीड़ित रहते हैं। इनमें से लगभग सभी पीड़ाओं से तत्काल मुक्ति हेतु हम दवाखाने जाते हैं और डॉक्टर की सलाहानुसार दवा का सेवन भी करते हैं। बहुत अच्छी बात है कि हम स्वास्थ्य के प्रति सतर्क हैं, लेकिन ध्यान रहे कि छोटी-छोटी पीड़ाओं और समस्याओं के लिए चिकित्सालय जाने की जरूरत नहीं क्योंकि आपके अपने घर में ही आपका अपना प्राथमिक चिकित्सालय है। आइए, अब रसोईघर में उपलब्ध सामग्री और उनके प्रयोग से होने वाले फायदों पर नजर डालें। 

हल्दी : हल्दी गुणों की खान है, वाकई बहुत महान है। हल्दी से हाथ पीले हुए बगैर जिंदगी को दिशा नहीं मिलती। हल्दी में औषधीय गुण हैं। एंटीबायोटिक है हल्दी। हल्दी, नमक और थोड़ा-सा सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों की मालिश करें। मुख-दुर्गध एवं पायरिया से निजात मिलेगी। गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी प्रतिदिन पिएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होगी और हड्डियां मजबूत रहेंगी। एक चम्मच हल्दी को थोड़ा भूनकर शहद के साथ लें, गला बैठना तंग नहीं करेगा और खांसी फुर्र हो जाएगी। कट जाए, जल जाए, चोट लग जाए तो हल्दी पाउडर लगाएं। रक्तस्राव बंद हो जाएगा, फफोला भी नहीं पड़ेगा। मोच आ जाए तो एक मोटी रोटी बनाकर उसमें सरसों का तेल व हल्दी डालें। गर्म रोटी को मोच वाली जगह पर बांधे, सूजन दूर हो जाएगी। हल्दी-चंदन और नीम पाउडर के मिश्रण को चेहरे पर लगाएं। न केवल झाइयां, फुन्सियां ठीक हो जाएंगी, चेहरा भी चमकने लगेगा। 

लौंग-इलायची : मुख-दुर्गंध से निजात दिलाने में लौंग-इलायची लाजवाब हैं। तभी तो भोजन के उपरांत लौंग-इलायची हम सभी खाना पसंद करते हैं। कुछ लोग सौंफ एवं अजवाइन भी पसंद करते हैं। तेज सिरदर्द हो तो लौंग को पीसकर थोड़ा पानी मिलाकर माथे पर लगाएं, सिरदर्द कम हो जाएगा। दांतों के दर्द में लौंग पाउडर से मालिश फायदेमंद है। लौंग तेल का फाहा भी लगा सकते हैं। लौंग को हलका भून लें और चूसते रहें, खांसी नजदीक फटकेगी तक नहीं। शरीर में कहीं भी फोड़ा-फुन्सी, नासूर हो गया हो तो लौंग-हल्दी पीसकर लगाएं। मुंह में छाले हों तो इलायची-शहद लगाएं। पेशाब में जलन हो तो मिश्री और इलायची पाउडर ठंडे पानी के साथ पीने से जलन कम होगी। हिचकी आ रही हो तो इलायची लौंग को पानी में उबालकर पी लें। यदि आराम न मिले तो प्रयोग को 2-3 बार दोहरा दें। निश्चित रूप से हिचकी आना बंद हो जाएगी।

जीरा राई : मसालों की शान है जीरा । शहजीरा मिल जाए तो क्या कहने। दस्त आ रही हो, पेट में मरोड हो रही हो तो जीरा भून-पीसकर दही, लस्सी, छांछ में सेवन करें। जीरा-सौंफ समान मात्रा में भून-पीसकर पानी के साथ दिन में 2-3 बार लें, पेट में मरोड़ की शिकायत शांत हो जाएगी। आंतों के कृमि भी मर जाते हैं। मूत्र विकार एवं प्रदर रोग में भी जीरे को पानी में उबालकर सेवन करें, फायदा मिलेगा।

मेथी : मधुमेह रोगियों के लिए मेथी फायदेमंद है। एक कप पानी में रात को मेथी भिगो दें। सुबह उसे पी लें, मेथी को चबाकर खाएं। वातरोग एवं हृदय रोग में भी मेथी फायदेमंद साबित होती है। मेथी-हल्दी-सौंठ को बराबर मात्रा में लेकर पाउडर बना लें। 1-1 चम्मच सुबह-शाम गर्म पानी अथवा दूध में लें। इससे जोड़ों का दर्द व सभी तरह के वात रोग एवं सूजन में फायदा मिलता है।

काली मिर्च : रात में सोने से पहले काली मिर्च मुंह में रखकर चूसते रहें, खांसी से छुटकारा मिलेगा और नींद भी अच्छी आएगी। चाय की जगह काली मिर्च-अदरक पीसकर काढ़ा बनाएं और उसका सेवन करें। सर्दी, खांसी, गले की खराश से छुटकारा पाएंगे। 

राई-अजवाइन : सिरदर्द होने पर राई को पीसकर माथे पर लेप लगाएं। शराब से छुटकारा चाहते हों तो आधा किलोग्राम अजवाइन को 4 लीटर पानी में उबालें। उबालना तब तक जारी रखें, जब तक पानी की मात्रा आधी नहीं हो जाती। भोजन के पूर्व प्रतिदिन लगभग 3 माह तक पिएं। शराब की लत से छुटकारा मिल जाएगा। अजवाइन को हलका भून-पीस लें। सुबह-शाम गर्म पानी में मिलाकर सेवन करें। सर्दी, जुकाम एवं पेट के रोगों से छुटकारा पा जाएंगे। 

धनिया : पेशाब ठीक से नहीं होती, अम्लपित्त से परेशान हैं, रक्तप्रदर हो रहा है या दस्त में खून जाने पर घबराएं नहीं। धनिया पाउडर पानी में पकाएं। एक-चौथाई पानी शेष रहने पर उसे छानकर बोतल में भर लें। शहद के साथ इसका प्रतिदिन सेवन करें। ठंडे पानी के साथ एक चम्मच धनिया पाउडर का सेवन करें। शरीर में अनावश्यक गमी शांत होनी, पेशाब ठीक होगी और एसिडिटी नहीं रहेगी। यहां तक कि अनावश्यक काम वासना भी शांत हो जाएगी।

लहसुन-प्याज-अदरक : गृहिणियों को लहसुन-प्याज एवं अदरक का पेस्ट तैयार कर लेना चाहिए। सब्जियां पकाते समय इनका प्रयोग करें, जायका बढ़ जाएगा। अदरक को चाय के मजे ही कुछ और हैं। भोजन के आरंभ में अदरक का छोटा-सा टुकड़ा चबाने से भूख बढ़ेगी। भोजन के उपरांत काली मिर्च साथ खाएं। पाचन क्रिया अच्छी रहेगी। शहद के साथ अदरक के रस का सेवन सर्दी, खांसी, जुकाम में औषधि का काम करता है। गर्मी एवं लू से निजात पाने के लिए जेब में प्याज रखें या गले में बांध लें। कच्चे प्याज को भूनकर फोड़े पर लगाने से पीड़ा समाप्त होगी। पेटदर्द है तो पानी में प्याज रस, नींबू रस एवं नमक मिलाकर पिएं, तत्काल आराम मिलेगा। पौथी लहसुन को टुकड़े करके रात में पानी में भिगो दें। प्रातःकाल खाली पेट सेवन करे। कॉलेस्ट्राल, हृदय रोग एवं संधिवात में भी लाभ मिलेगा। ऑक्सीजन की कमी वाले इलाके में एक लहसुन को ताबीज की तरह गले में लटकाकर रखें, फायदा मिलेगा। 

नींबू : नींबू के रस में थोड़ा अदरक व थोडा नमक मिलाकर भोजन के साथ लें, भूख बढ़ेगी। जी मचलता हो या उलटी हो रही हो तो नींबू काटकर नमक लगाकर चूसें, फायदा मिलेगा। रक्तस्राव में भी तुरंत लाभ मिलेगा। नींबू रस में शहद मिलाकर चेहरे पर लगाएं। कील-मुंहासों से निजात पाएंगे। 

जलजीरा : नींबू पानी पाचन क्रिया में सहायक सिद्ध होता है। 

एलोवेरा : एलोवेरा के गूदे को निकालकर टुकड़े बनाएं और सब्जी की तरह पकाकर खाएं। इससे संधिवात, वायु-विकार, पेट व यकृत के विकारों का नाश होता है तथा एसिडिटी से राहत मिलेगी, कटे हुए या जले हुए स्थान पर तत्काल एलोवेरा जेल या रस लगाएं। जख्म जल्दी ठीक होगा, फफोला व दाग नहीं पड़ेगा और रक्तस्राव बंद हो जाएगा। चेहरे पर लगाने से उसकी चमक बढ़ती है।

अब तो आपको कहना ही पड़ेगा कि रसोईघर किसी प्राथमिक चिकित्सालय से कम नहीं। इसे स्वच्छ रखिए, अपडेट रखिए, आरोग्य पाइए, स्वस्थ रहिए।

Rajendra Mishra

राजेन्द्र मिश्रा
'राज', नागपुर

राजेन्द्र मिश्रा
'राज', नागपुर

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