उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखकर यही निष्कर्ष निकलता है कि गुरु नानक देव पूरे जगत के गुरु बाबा हैं तथा श्री गुरु ग्रंथ साहिब में सभी धर्मावलंबियों की दर्ज बाणियां यही दर्शाती हैं कि गुरु नानक देव व श्री गुरु ग्रंथ साहिब सभी धर्मावलंबियों के लिए पूजनीय हैं। इस तरह उनकी पूजा अर्चना करना सभी धर्मावलंबियों का स्वतंत्र अधिकार है तथा सभी को अपने-अपने ढंग से पूजा अर्चना करने का पूर्ण अधिकार है क्योंकि गुरुओं ने भी अन्य धर्मों की पूजा परिपाटी में हस्तक्षेप न कर उन्हें चलने दिया है।
अतः सहजधारी संगत को गुरु नानक देवजी की आज्ञा के अनुसार श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पूजा पुरातन हिंदू धर्म के अनुसार करने की स्वतंत्रता है। इतिहास भी गवाह है कि हमारे गुरुओं ने हमेशा अन्याय व जबरदस्ती का विरोध ही किया है।
नोट
लेखक ने इस पुस्तिका में सहजधारी सिखों की मर्यादा को ध्यान में रखकर श्री गुरु ग्रंथ साहब, श्री दसम ग्रंथ, भाई गुरदास की वार व अन्य धार्मिक पौराणिक पुस्तकों के आधार पर व्यक्तिगत रुप से किए हैं। गुरबाणी के अनेक बद्धिजीवी लोग अपनी समझ अनुसार अलग-अलग अर्थ निकालते हैं और हमारा उद्देश्य भी किसी की भावना को ठेस पहुंचाना कदापि नहीं है तथा न ही हमारे विचार किसी के ऊपर थोपने का प्रयास हैं। इस पुस्तिका को पढ़ने के बाद भी लोग अपने स्वतंत्र विचार से चल सकते हैं।