युवाओं को सत्संग से जोड़ा

आपि जपहु अवरा नामु जपावहु ।।
सुनत कहत रहत गति पावहु।। अंग 289

जैसे कि मैंने प्रारंभ में ही लिखा है कि कुछ लोग सांचे में ढल जाते हैं और कुछ लोग सांचे को ढाल देते हैं। आदरणीय अधिवक्ता माधवदास जी ममतानी ने आध्यात्मिक क्षेत्र में जो उल्लेखनीय योगदान दिया है वह अपने आप में बहुत बड़ी मिसाल है। चूंकि अक्सर यह देखा गया है कि यदि किसी युवा साथी को कहें कि चल सत्संग पर चलते हैं तो पहले तो वह हैरत भरी नज़रों से देखता है और कहता है अरे यार… यह कोई उम्र है सत्संग की! मौज मस्ती की उम्र है, खाने पीने की उम्र है, बुढ़ापे में देखेंगे।

ऐसी विषम परिस्थितियों में समाज के हजारों युवाओं को सत्संग से जोड़ने का पुनीत कार्य ममतानीजी ने किया है। इतना ही नहीं सैकड़ों युवा कीर्तनकार बनाए जो वकील साहिब की प्रेरणा पाकर, श्री कलगीधर सत्संग मंडल में तो कीर्तन करते ही हैं लेकिन अलग-अलग शहरों में वकील साहिब के साथ गुरुबाणी पर ही आधारित कीर्तन निःशुल्क करते हैं। छोटे छोटे बाल कीर्तनकार भी अधिवक्ता माधवदासजी ममतानी की प्रेरणा पाकर गुरु महाराज के गुणों का बखान पूरे अनुशासन व श्रद्धा के साथ करते हैं।

‘व्यसन मुक्ति का चलाया अभियान’

युवाओं को सत्संग कीर्तन से जोड़ने के उपरांत ममतानीजी ने युवाओं को व्यसनों से मुक्ति दिलाने का सराहनीय कार्य किया है। आज बड़ी संख्या में सेवादारी व सत्संगियों ने व्यसन-मुक्ति का संकल्प लेकर एक आदर्श स्थापित कर दिया है।

सिंधी भाषा के प्रचारक

सिंधी संस्कृति, सभ्यता व मातृभाषा को सिंधी समाज धीरे-धीरे भूलता जा रहा है। खासकर सिंधी युवा वर्ग। अधि. माधवदास ममतानी अपने सत्संग कीर्तन के दौरान संगत से आव्हान करते हैं कि अपने बच्चों से, परिवार में, मित्रों से अपनी मातृभाषा सिंधी भाषा में ही बात करें। सिंधुड़ी यूथ विंग नागपुर द्वारा प्रति वर्ष झूलेलाल मंदिर में आयोजित सिंधी विषय में सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाले विद्यार्थियों को अपनी धर्मपत्नी स्व. लक्ष्मीदेवी की स्मृति में स्मृति चिन्ह प्रदान करते हैं। वे इस कार्यक्रम में स्वयं प्रमुख रुप से उपस्थित रहते हैं और सभी से सिंधी भाषा बोलने हेतु हजारों लोगों को आव्हान करते हैं।

चेट्रीचंद्र झूलेलाल जयंती पर विशाल स्कूटर एकता रैली

इष्टदेव झूलेलाल जी की जयंती चेट्रीचंड्र के शुभ दिन पर श्री कलगीधर सत्संग मंडल जरीपटका नागपुर से विगत 20 वर्षों से लगातार भारतीय सिंधू सभा नागपुर की ओर से अधि. माधवदास ममतानी की प्रमुख उपस्थिति में श्री घनश्यामदास कुकरेजा व वीरेंद्र कुकरेजा के नेतृत्व में ‘विशाल स्कूटर एकता रैली’ जय झूलेलाल, आयोलाल झूलेलाल के जय घोषों के साथ निकलती है।

झूलेलाल शोभायात्रा में झांकी

सिंधू झूलेलाल वेल्फेयर सोसायटी, झूलेलाल मंदिर, गांधी सागर, नागपुर से प्रति वर्ष निकलने वाली “झूलेलाल शोभायात्रा” में श्री कलगीधर सत्संग मंडल की ओर से अधि. माधवदास ममतानी के मार्गदर्शन में बहराणा साहिब व गुरुओं की झांकी प्रेषित की जाती है।

झूलेलाल मंदिर, गांधी सागर में आयोजित कार्यक्रम हेतु श्री कलगीधर सत्संग मंडल से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को बसों द्वारा झूलेलाल मंदिर हेतु रवाना करना आदि उल्लेखनीय सेवाएं प्रदान करते हैं।

हम सनातनी सहजधारी शिष्य

दसवीं पातशाही साहिब श्री गुरु गोबिंदसिंग जी द्वारा रचित “दसम न केवल वर्णन किया है अपितु श्रीराम जन्मोत्सव का आयोजन ग्रंथ” में 24 अवतारों का वर्णन किया है। उन सभी अवतारों की कथा भी बतायी है। प्रति वर्ष श्री रामनवमी के पावन पर्व पर श्री कलगीधर सत्संग मंडल की ओर से संयोजक अधिवक्ता माधवदास ममतानी के मार्गदर्शन में भगवान श्री राम जन्मोत्सव मनाया जाता है।

श्री गुरु गोबिंदसिंग द्वारा रचित “दसम ग्रंथ” में 24 अवतारों का समावेश है, श्री गुरु गोबिंदसिंग साहिब द्वारा लिखित “राम कथा जुग जुग अटल” इसी को आधार मानकर अधि. माधवदास ममतानी राम कथा श्रवण करवाते हैं। रामायण के बहुत सारे प्रसंगों को दसम ग्रंथ में समाविष्ट किया गया है।

प्रति वर्ष राम नवमी के दिन श्री पोद्दारेश्वर राम मंदिर ओर से देश विदेश में सुविख्यात श्री राम शोभायात्रा में श्री कलगीधर सत्संग की ओर से श्री गुरु नानक देव व व श्री गुरु गोविंदसिंग साहिब की चित्र वाली आकर्षक झांकी श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ शामिल की जाती है।

योगीराज श्री कृष्ण जन्माष्टमी व गोकुल अष्टमी का आयोजन

भगवान योगीराज कृष्ण की जन्माष्टमी व गोकुल अष्टमी तथा महाशिवरात्रि पर श्री कलगीधर सत्संग मंडल द्वारा सत्संग कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

गुरु नानक देव मॅरिज ब्युरो

श्री कलगीधर सत्संग मंडल के संयोजक अधिवक्ता माधवदासजी ममतानी ने जहां प्रभू सिमरन से आम आदमी को जोड़ा वहीं समाज सेवा के लिए भी समाज को प्रेरित किया करते हैं। समाज में विवाह योग्य युवक-युवतियों की अहम समस्या को ध्यान में रखकर, गुरु नानक देव मॅरिज ब्युरो की स्थापना की। आज के युग में रिश्ते उतने जल्दी तय नहीं होते जितना कि पहले हुआ करते थे। बहुत परेशानियों का सामना दोनों पक्षों को करना पड़ रहा है।

श्री कलगीधर सत्संग मंडल द्वारा संचालित गुरु नानक देव मैरिज ब्युरो सेंटर में हजारों की संख्या में हर वर्ग के युवक युवतियों के बायोडाटा उपलब्ध हैं। जहां पर गुरु महाराज की कृपा से अनेकों अनेक युवक-युवतियों के रिश्ते तय हुए हैं। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, जरीपटका स्थित इस मॅरिज ब्यूरो सेंटर का समय प्रतिदिन शाम 7 से 8.30 रहता है।

गुरु हरिक्रिशन धर्मार्थ दवाखाना

यह हाउसिंग बोर्ड सोसाइटी में समाज के सभी वर्गों के लिए चिकित्सा सेवा केन्द्र कार्यरत है।

श्री गुरु गोबिंद सिंग जयंती निमित्त
इच्छापूरक सप्ताह पाठ सामूहिक प्रार्थना

रामचरितमानस में तुलसीदास ने लिखा है कि
कलियुग केवल नाम अधारा
सिमरि-सिमरि नर उतरहिं पारा।

श्री सुखमनी साहिब के रचयिता श्री गुरु अरजन देव जी ने सुखमनी साहिब की प्रथम अष्टपदी के प्रारंभ में ही लिख दिया कि

सिमरउ सिमरि सिमरि सुख पावउ ।
कलि कलेस तन माहि मिटावउ ।।

आदरणीय माधवदासजी ममतानी ने हमेशा नाम सिमरन पर जोर दिया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंग जयंती निमित्त श्री कलगीधर सत्संग मंडल में सप्ताह पाठ का आरंभ करने का निर्णय लिया और इस धार्मिक अनुष्ठान को इच्छापूर्ति सामूहिक नाम सिमरन का नाम दिया। एक सप्ताह तक श्री जपुजी साहिब के पाठ के साथ गुरुवाणी शब्दों के साथ सम्पुट पाठ का आरंभ किया। दोपहर 1 बजे से शाम 7 बजे तक गुरुवाणी के माध्यम से नाम सिमरन करवाना वह भी हजारों श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से, अपने आप में बहुत बड़ी मिसाल है। अधिवक्ता माधवदास ममतानी अपने कीर्तन में बताते हैं कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के रागु गउडी में गुरबाणी फरमाती है।

सतजुगि सतु तेता जगी दुआपरि पूजाचार।।
तीनौ जुग तीनौ दिड़े कलि केवल नाम अधार।। (अंग 346)

अर्थात सतयुग में केवल सत्य ही चलता था. उसे स्वर्ण काल कहा गया। त्रेतायुग को चांदी काल की उपमा दी गई उस समय धर्म-कर्म-दान-यज्ञ आदि को बढ़ावा दिया गया। द्वापर को पीतल काल कहा गया, उस समय देवताओं की पूजा पाठ को प्रमुख महत्व दिया गया और कलियुग को लोहे काल से परिभाषित किया गया है और कलियुग में केवल नाम आधार ही परमात्मा को पाने का सरल मार्ग बताया गया है।

‘हजारों श्रद्धालुओं की होती हैं इच्छाएं पूरी’

इंसान को इच्छाओं का पुतला कहा गया है जब तक इंसान जीवित रहता है तब तक इच्छाएं उसका पीछा नहीं छोड़तीं। इन शुभ इच्छाओं की पूर्ति हेतु वह भगवान के दर पर, अपने गुरु के श्रीचरणों में जाकर प्रार्थना करता है, अरदास करता है। ‘विरथी कदै न होवई जन की अरदासि’ (अंग 899)

श्री कलगीधर सत्संग मंडल की स्थापना

अधि. माधवदास ममतानी द्वारा निवास पर स्थापित सत्संग केंद्र को नाम दिया श्री कलगीधर सत्संग मंडल, उस समय 13 लोग जुड़े थे। सतगुरु गुरु नानक देव जी के आशीर्वाद से गुरवाणी पर आधारित सत्संग कीर्तन प्रति रविवार को निरंतर होने लगा, श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में बढ़ने लगी।

गुरु नानक देव जी की जयंती पर शोभायात्रा

श्री कलगीधर सत्संग मंडल की ओर से प्रथम बार गुरु नानक देव जी की जयंती पर शोभायात्रा निकाली गई। उस समय से श्रद्धालु बढ़ते गए। वकील साहिब द्वारा परमात्मा के सिमरन हेतु किया गया बीजारोपण भक्ति रुपी पानी व श्रद्धा रूपी खाद अब नन्हे पौधे से वटवृक्ष में परिवर्तित हो गया है।

‘श्री कलगीधर सत्संग मंडल में कोई पद नहीं’

सभी श्रद्धालु अब सत्संग कीर्तन में शामिल तो होने लगे कुछ श्रद्धालु सेवा कार्य में भी हाथ बंटवाने लगे, गुरु नानक देव व गुरुवाणी के प्रति आस्था बढ़ने लगी। साथ ही साथ सेवाधारियों की संख्या में भी बढ़ोतरी होती रही।

सतगुरु सेवि मनु निरमला, हउमै तजि विकार ।
आपु छोडि जीवत मरै, गुर के सवदि वीचार ।॥
धंधा धावत रहि गए, लागा साचि पिआरु ।
सचि रते मुख उजले, तितु साचै दरबारि ।।
(गुरु ग्रंथ साहिब अंग 34)

सतगुरु की सेवा करते हुए मन निर्मल हो जाता है और मन विकारों से दूर हो जाता है, गुरु के शब्दों का ध्यान करने से अहंकार की मृत्यु हो जाती है। अपने सतगुरु की सच्ची सेवा करने वालों का मुख प्रभू की दरबार में हमेशा उजला एवं ऊंचा रहता है।

अक्सर यह देखा गया है कि, सेवा करने वाले सेवादारी जब किसी पद पर आ जाते हैं तो कुछ लोगों को अहंकार आ जाता है। और जब अहंकार आ गया तो निजी स्वार्थ की उत्पत्ति होती है, फिर वह सेवादारी नहीं रहता केवल पदाधिकारी ही रह जाता है।

“तुम भी सेवादारी में भी सेवादारी”

अधिवक्ता माधवदास ममतानी हमेशा एक ही बात कहते हैं कि जो भी इस सत्संग मंडल में हो रहा है गुरु नानक देव जी ही कर रहे हैं। जिस तरह तुम सेवादारी हो उसी तरह मैं भी सेवादारी हूं। शायद पूरे देश या विदेश में श्री कलगीधर सत्संग मंडल नागपुर ही एक ऐसा धार्मिक केंद्र है जहां पर कोई अध्यक्ष नहीं सचिव नहीं पदाधिकारी नहीं। सभी सेवादारी हैं।

‘माया भेंट ना रखें’ अनूठा धार्मिक स्थल

जब भी हम किसी मंदिर या धार्मिक स्थल पर जाते हैं तो वहां एक दान पेटी रहती है और लिखा हुआ रहता है कृपया माया दान पेटी में डालें। और यहां बिल्कुल विपरीत है, दान पेटी तो है ही नहीं! सत्संग मंडल की हर जगह पर लिखा रहता है कि “कृपया माया भेंट ना रखें” और किसी ने अनजाने में रख दिया तो माईक पर सूचना दी जाती है कि जिसने भी माया भेंट रखी है वह वापस उठा ले। हां प्रसाद लेकर आने की मनाही नहीं है। प्रसाद संगत में बांट लिया जाता है।

घर को ही बनाया सत्संग केंद्र

जब उस परमात्मा की भक्ति की ज्योति हृदय में प्रञ्जलित हो जाती है तो आम आदमी अपने बस में नहीं रहता।

जिथे जाइ बहै मेरा सतिगुरु
सो थानु सुहावा राम राजे
(अंग 450)

इंदिरा गांधी कालोनी जरीपटका नागपुर में आज जहां पर श्री कलगीधर सत्संग मंडल स्थापित है वह अधिवक्ता माधवदास ममतानी का निवास था जोकि अब भी है। इनके निवास के पीछे खुला मैदान था जहां पर हम कुछ मित्र खेलने जाया करते थे। एक बार हमने दूर से देखा कि एक व्यक्ति घर के आंगन में तबला बजा रहा है और तीन लोग बैठे हैं। हम जैसे नजदीक आए तो वकील साहब ने आवाज दी और बैठने को कहा। वहां पर गुरु नानक देव जी का चित्र रखा हुआ था, हम नमस्कार करके बैठ गए और थोड़ी देर बाद हम चले आए। अब उन्होंने प्रति रविवार को दोपहर 4 बजे इसी स्थान याने कि अपने घर में ही सत्संग करना आरंभ कर दिया।

मैं तो अकेला ही चला था जानिवे मंजिल मगर
लोग जुड़ते गए और कारवां बनता गया ।

ऐसे ही नहीं जुड़ते हैं लोग, वह भी सत्संग के लिए। बकील साहब ने कड़ी मेहनत की। एक वकील चल पड़ा उस परमात्मा की भक्ति से जोड़ने के लिए। जैसे एक सेल्समैन अपने प्राडक्ट मार्केटिंग करता है उसी प्रकार एक-एक घर में जाकर आम आदमी को प्रभु-परमात्मा की भक्ति से जोड़ने का अथक प्रयास किया।

पूरा प्रभु आराधिआ पूरा जा का नाउ ।
नानक पूरा पाइआ पूरे के गुन गाउ ।।
(सुखमनी साहिब)

गुरु नानक देव जी की असीम कृपा से और वकील साहिब की गुरु भक्ति व उनकी लगन का प्रतिफल यह हुआ कि लोग सत्संग में अब कुछ अधिक मात्रा में जुड़ने लगे। मन में सच्चाई और दृढ़ संकल्प के कारण अधि. माधवदास ममतानी वकालत के पेशे साथ साथ परमात्मा की भक्ति की वकालत भी करने लगे। वे सभी से यही कहते कि जपुजी साहिब का पाठ करो। प्रभू का सिमरन व सत्व्यवहार करिए। किसी ने लिखा है कि-

इक वार भजन कर ले, प्रभू का सिमरन कर ले।
कट जाएगी चौरासी, इक बार जतन कर ले ।।

‘कन्या विवाह हेतु गुरु नानक भंडारी’

श्री कलगीधर सत्संग मंडल में नित्यनेम आनेवाली विवाह योग्य बेटियों के लिए, उनके विवाह में गुरुनानक भंडारी की व्यवस्था कई वर्षों से की जा रही है। जिस बेटी का विवाह होना होता है तब अधिवक्ता माधवदासजी ममतानी बस इतनी घोषणा कर देते हैं कि आज सत्संग में आनेवाली बिटिया की शादी का सत्संग है तब सेवादारी, पुरुष, माताएं, बहनें अपनी यथाशक्ति अनुसार गुरु नानक भंडारी में सहयोग राशि जमा करवाते हैं और जितनी भी धन राशि जमा हो जाती है वह उसके परिवार को सौंप दी जाती है। इस प्रकार विवाह कार्य में परिवार को आर्थिक सहायता प्राप्त हो जाती है।

‘समाज सुधारक की भूमिका’

संत महापुरुष हमें प्रभू सिमरन से तो जोड़ते ही हैं लेकिन समाज में चल रही कुरीतियों पर किस प्रकार अंकुश लगाया जाए इस ओर भी अधिवक्ता माधवदासजी ममतानी ने रचनात्मक कदम उठाए।

‘दहेज नहीं मांगें’

शादी विवाह में दहेज इत्यादि देने की बहुत ही प्राचीन प्रथा रही है, लड़की वाले अपने सामर्थ्य के अनुसार दहेज देते हैं। लेकिन कुछ तथाकथित स्वार्थी तत्व दहेज के लिए कन्या पक्ष को प्रताड़ित करते थे। अधिवक्ता ममतानीजी सत्संग में अक्सर यह कहा करते थे और आज भी कहते हैं कि स्वेच्छा से दिया गया दहेज वरदान है और मांग कर लिया हुआ दहेज अभिशाप है।

‘सगाई में केवल 15 लोग’

कहते हैं रिश्ते तो ऊपर वाले ने तय कर रखे हैं, जब मुहर लग जाती है तो रिश्ता याने सगाई तय हो जाती है। सगाई होने पर फिर सगाई समारोह होता है और समारोह में सैकड़ों लोग शामिल होते हैं। खाना-पीना लेन देन सब होता है। आम आदमी के लिए यह सब महज एक दिखावा साबित होता है और समय व खर्च की बरबादी के सिवाय हासिल कुछ भी नहीं होता। इसी बात को ध्यान में रखकर वकील साहिब ने एक नियम बनाया है कि सगाई समारोह में लड़के वालों की ओर से मात्र 15 लोग व सोलहवां लड़का ही जाएंगे, इस नियम का आज भी अनुसरण हो रहा है।

जरुरतमंदों को लाखों रुपयों के कपड़े की सामग्री का वितरण’

दसवीं पातशाही साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंग जयंती पर सप्ताह पाठ का विशाल धार्मिक आयोजन श्री कलगीधर सत्संग मंडल में गुरु महाराज की असीम कृपा से, अधिवक्ता माधवदासजी ममतानी के मार्गदर्शन में हर वर्ष किया जाता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आकर गुरु महाराज के आगे नतमस्तक होकर अपना शीश झुकाते हैं। नियमानुसार माया भेंट रखने की तो मना ही रहती है। यथा शक्ति प्रसाद लाया जा सकता है, वह भी संगत में ही बांट दिया जाता है।

सप्ताह पाठ साहिब का जिस दिन भोग साहिब (समापन) होता है तब हजारों श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार गुरु महाराज को वस्त्र, कंबल, चादर व अनेक भेंट वस्तुएं बड़ी संख्या में अर्पित करते हैं। देखते ही देखते लाखों रुपयों की सामग्री एकत्रित हो जाती है। संगत की भी यह बात मालूम रहती है कि हम जो गुरु महाराज को भेंट कर रहे हैं, वह गुरु के प्यारों को भेंट स्वरुप दी जाएगी। जितने भी वस्त्र और खाद्य व अन्य सामग्री कुछ भी शेष ना रखते हुए लाखों रुपयों की सामग्री का वितरण श्री कलगीधर सत्संग मंडल द्वारा किया जा जाता है।

‘करनी है तो कर खिजमत जरुरतमंदों की ।
नहीं मिलता यह गौहर बादशाहों के खजाने में ।।

‘देश के अलग-अलग शहरों में गुरबाणी का प्रचार-प्रसार

दस गुरुओं व हाजरा हजूर 11वीं पातशाही श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बाणी व उपदेशों को जन मानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से गुरबाणी कीर्तन यात्रा का आरंभ अधिवक्ता माधवदासजी ममतानी ने चार दशक पूर्व किया था जो आज भी जारी है। देश के अलग-अलग शहरों में जाकर आम आदमी को प्रभु सिमरन (गुरुवाणी के आधार पर) से जोड़ने का सफल प्रयास किया है। श्री कलगीधर सत्संग मंडल के युवा कीर्तनकार अपने साथ लेकर जाते हैं। जिस शहर में सत्संग का आयोजन किया जाता है वहां के आयोजकों से आने जाने का किराया नहीं लिया जाता है। केवल आयोजकों के रहने व भोजन की व्यवस्था करनी पड़ती है। सत्संग की भेटा नियमानुसार आयोजक से एक रूपया लिया जाता है। जहां पर सत्संग होता है वहां पर श्री जपुजी साहिब, गुरुमूर्तियाँ व गुरुवाणी के शब्द का निःशुल्क वितरण किया जाता है।

‘सोशल मीडिया से गुरवाणी का प्रचार-प्रसार’

अधिवक्ता माधवदासजी ममतानी ने अपनी पहली आडियो कैसेट टी सीरीज़ के अंतर्गत ‘कलि तारण गुरु नानक आया’ रिलीज की, जिसे श्रद्धालुओं ने पसंद किया। गुरबाणी के प्रचारार्थ अनेक आडियो कैसेट टी-सीरिज के जरिए रिलीज करवाई। इसके उपरांत डी.वी.डी. तथा वर्तमान में पेन ड्राइव के जरिए गुरुवाणी के शब्दों व गुरुओं की साखीयों को आम आदमी तक पहुंचाने का सफल प्रयास किया जा रहा है। टी.वी. चैनल्स, फेसबुक व यू-ट्यूब के जरिए अधिवक्ता माधवदासजी ममतानी आम लोगों गुरबाणी से जोड़कर परमात्मा का सिमरन करवा रहे हैं। गुरुवाणी फरमाती है कि

थान पवित्रा, मान पवित्रा पवित्र सुनन कहनहारे ।
कह नानक ते भवन पविना जा महि संत तुम्हारे ।।

श्री गुरु नानक देव जी फरमाते हैं कि वह स्थान पवित्र है, वहां की मान्यता पवित्र है, वहां के कहने वाले, सुनने वाले भी पवित्र हो जाते हैं। उस भवन की हर चीज पवित्र हो जाती है जहां तुम्हारे सच्चे संत रहते हैं।

जिथे जाइ बहै मेरा सतिगुरु
सो थानु सुहावा राम राजे ।

ऐसे पवित्र पुनीत स्थान श्री कलगीधर सत्संग मंडल जहां पर सतगुरु विराजमान हैं शीश नवाता हूं। एक ऐसे संत पुरुष अधिवक्ता माधवदासजी ममतानी जिन्होंने हजारों लाखों लोगों को प्रभू सिमरन से जोड़ा साथ ही सेवा का, सत्संग का मार्ग दर्शाया।

देश का शायद ही ऐसा कोई तीर्थ होगा, जहां गुरुओं की पावन रजलि नहीं पड़ी। गुरुओं ने विदेशी इस्लामी हमलावरों से त्रस्त और पस्त हो रहे समाज में फिर से उत्साह और ऊर्जा पैदा की।
श्री गुरु नानक देव की दृष्टि में सच्चा गुरू, परम शिक्षक वही है जो सबको एक-दूसरे के साथ जोड़ देता है.

सबके हृदय से घृणा दूर कर सबको मिलाता है।

नानक सतिगुरु ऐसा जाणीजै जो सबसे लए मिलाई जीउ ॥

भारत विभाजन के बाद जहां भी सिंधी गए उन्होंने गुरु नानकदेव जी के उपदेशों को आत्मसात कर धर्मशालाएं बनवाई और वहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया। पिछले कुछ दशकों में मर्यादा परंपरा के कारण वे इतने भयभीत हो गए कि अनेक सिंधी धर्मशालाओं से श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश उठा लिया गया लेकिन आज भी उनके मन में गुरु नानक देव जी एवं गुरबाणी के प्रति अपार श्रद्धा है। सिंधी संगत आज भी बड़े प्रेम से गुरबाणी गायन-जाप-सेवा व गुरुघर का प्रचार करती है। जहां पर भी सिंधी साधसंगत है वहां गुरु नानक देव साहिब के अवतार दिवस गुरपूरब पर बड़ी श्रद्धा के साथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब की अगुआई में नगर कीर्तन अर्थात् शोभायात्रा निकाली जाती है।

गुजरात का सैनी समाज अपने विवाह आदि पर गुरु नानक देव महाराज के नाम पर अभी भी अपनी पुरातन मर्यादा अनुसार सवा रुपया भेंट निकालते हैं। भारत में बंजारा व लवाणा बिरादरी है उनमें से अधिकांश गुरु नानक देव जी को अपना इष्टदेव मानती है।

तीसरी पातशाही श्री गुरु अमरदासजी ने यह सोचा कि समाज में जाति व व्यवसाय के आधार पर जो ऊँच-नीच बनी है उसे समाप्त करना जरुरी है इसलिए उन्होंने पंगत याने एक साथ बैठकर लंगर खाने की परंपरा प्रारंभकी जिसमें तत्कालीन बादशाह अकबर से लेकर सफाईकर्मी व तत्कालीन समस्त जातियों के लोग एक बराबर एक साथ व एक जैसा लंगर छकने लगे।

अमृतसर में ही छठवें गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब द्वारा बनवाया गया कौलसर सरोवर माता कौलां के नाम पर बना है जो मुस्लिम जाति की थीं, जिसमें आज भी अनेक सिख श्रद्धापूर्वक स्नान करते हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भगत कबीर जी फरमाते हैं कि परमात्मा के नाम के गायन, श्रवण, पाठ, चिंतन का अधिकारी हर व्यक्ति है-

कोई गावै को सुणै हरि नामा चितु लाइ ।
कहु कवीर संसा नही अंति परम गति पाइ ।।
(अंग 332)

श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी महाराज दसम ग्रंथ में फरमाते हैं प्रभु परमात्मा एक है और हम सब उस परम पिता परमेश्वर की एक ही संतान हैं-

कोऊ भइओ मुंडीया संनिआसी कोउ जोगी भड़ओ
कोऊ ब्रह्मचारी कोउ जती अनुमानबो ।।
हिंदू तुरक कोऊ राफिजी इमाम साफी
मानस की जाति सबै एकै पहिचानबो ।।
करता करीम सोई राजक रहीम ओई
दूसरो न भेद कोई भूलि भ्रम मानवो ।।
एक ही की सेव सभ ही को गुरदेव
एक एक ही सरूप सबै एकै जोति जानवो ॥
देहरा मसीत सोई पूजा औ निवाज
ओई मानस सबै एक पै अनेक को भरमाउ है ।।
देवता अदेव जॅष्ठछ गंधरव तुरक हिंदू निआरे
निआरे देसन के भेस को प्रभाउ है ।।
एके नैन एकै कान एके देह एकै बान
खाक बाद आतिस औ आब को रलाउ है ।।
अलह अभेख सोई पुरान औ कुरान ओई
एक ही सरूप सबै एक ही बनाउ है ।। 6 113611

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