परिवार

हर व्यक्ति की कामयाबी, हर सफलता व खुशी में परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहता है, जो मन को विश्वास, सुरक्षा और खुशी से भर देता है। परिवार चार अक्षरों का एक शब्द है और इस एक शब्द में ममत्व, प्यार, समर्पण का भाव समाया हुआ है। मतलब इंसान का पूरा संसार समाया हुआ है।

कुछ लोग प्रभु-परमात्मा को पाने के लिए वन में, पहाड़ों पर जाकर अपनी धुनी रमाते है, कुछ योग से तो कुछ तपस्या करते हैं। परंतु कुछ लोग गृहस्थ जीवन का निर्वाह करते हुए, परिजनों को साथ लेकर उनका भरण पोषण करते हुए परमात्मा की भक्ति स्वयं तो करते है लेकिन औरों को भी भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे महान पुरुषों के लिए गुरबाणी भी फर्माती है।

राज महि राजु, जोग महि जोगी ।
तप महि तपीसरु ग्रिहसत महि भोगी ।

अधि. माधवदास ममतानी ने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। जो संघर्ष के दौरान सभी पर आते हैं। परिवार के साथ साथ सत्संग कीर्तन वह भी बिना किसी आर्थिक लाभ के आज के इस दौर में बड़ी कठिन बात है। परिवार की जिम्मदारियो को निभाते हुए भक्ति करना तो एक हद तक तो ठीक है लेकिन अपने घर को ही सत्संग स्थल बनाना अपने आप में चुनौती वाला कार्य है।

मैंने परिवार की बात ऊपर की थी तो जानते हैं ममतानीजी के परिवार के बारे में। वकील साहिब के पिताजी का नाम स्व. बंसीलाल व दादाजी का नाम श्री स्व. हरुमल ममतानी था। भाई का नाम स्व. केशवदास ममतानी, बड़े चाचाजी स्व. छांगोमल व चाची का नाम स्व. श्रीमती पिसंददेवी (वणी माउ), उनकी बेटी का नाम स्व. वणी (किकी) तथा जवाई स्व. खीमनदास, छोटे चाचाजी का नाम स्व. श्री टेकचंद व चाची स्व. धर्मीदेवी था। इनके तीन सुपुत्र थे स्व. मनोहरलाल, स्व. भगवानदास व स्व. रमेश ममतानी तथा एक सुपुत्री हैं श्रीमती मीरा मलुकानी तथा इनके पति का नाम स्व. श्री प्रकाश मलुकानी (इंदौर) है।

वकील साहिब सदैव अपने सत्संग में यह संदेश देते हैं कि अपने माता पिता व बुजुर्गों की सेवा करो, उन्हें सम्मान दो, उनका आशीर्वाद लो चूंकि वे स्वंय अपनी चाची की माता तुल्य सेवा करते थे और उनका ख्याल भी रखते थे।

जिसे सभी “काकी” के नाम से पुकारते थे। अधि. माधवदास ममतानी की धर्मपत्नी का नाम स्व. श्रीमती लक्ष्मीदेवी ममतानी था। ममतानीजी को चार संतानें हुईं। सुपुत्री नेहा तलरेजा (मीना), डॉ. गुरमुख ममतानी, श्री कमल ममतानी, अधि. स्व. पूरन ममतानी। जवाई का नाम स्व. श्री नरेश कुमार तलरेजा (रानीखेत), नाती कु. स्तुति आहुजा (कानपुर) व काव्य तलरेजा (रानीखेत) पुत्रवधुएं डॉ. अंजू ममतानी, सौ. हर्षा ममतानी, डॉ. इंदू ममतानी। पौत्र डॉ. हरकिशन ममतानी, चमन ममतानी, राम ममतानी. पौत्रवधु डॉ. निधी ममतानी, पोत्रियां सी. कीर्ति सागर मंघानी (बल्लारशा), सौ. पूजा विनय दादलानी (नागपुर) व डॉ. डॉली ममतानी।

इस परिवार की खासियत यह है कि परिवार का प्रत्येक सदस्य श्री जपुजी साहिब का पाठ नित नेम से करते हैं और अपने पिताजी व दादाजी के बताये हुए मार्ग का अनुसरण करते हैं।

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